
जयपुर। पाठकों की पहली पसंद के साथ राजस्थान पत्रिका एक बार फिर सिरमौर रही है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस)- 2017 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक आपकी पत्रिका ने यह गौरव हासिल किया है। आईआरएस के मुताबिक राजस्थान में राजस्थान पत्रिका की औसत दैनिक पाठक संख्या 74 लाख 4 हजार हो गई है। जबकि प्रतिस्पर्धी समाचार पत्र की औसत दैनिक पाठक संख्या मात्र 48 लाख 35 हजार है। इस तरह से राजस्थान पत्रिका ने प्रतिस्पर्धी पर 25 लाख 69 हजार पाठक संख्या की बढ़त हासिल की है जो 53.13 फीसदी से अधिक है।
लगभग चार साल के इंतजार के बाद भारतीय पाठक सर्वेक्षण -2017 के आंकड़े मीडिया इंडस्ट्रीज के सम्मुख प्रस्तुत किए गए। यह हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे आधुनिक पाठक सर्वेक्षण है। सर्वेक्षण के नतीजे गुरुवार को मुम्बई में जारी किए गए। देश भर में करीब 3 लाख 20 हजार परिवारों का सर्वेक्षण अनूठे डबल स्क्रीन पर्सनल कम्प्यूटर के माध्यम से किया गया जिसमें सर्वे के दौरान पाठक और साक्षात्कारकर्ता की बातचीत भी रिकॉर्ड की गई। ऐसा आंकड़ों को और प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए किया गया। वर्ष 2014 में किए गए इस तरह के सर्वेक्षण को कुछ समाचार पत्रों ने नकार दिया था। पूर्व सर्वे में जो आपत्तियां थी उनको ध्यान में रखते हुए इस सर्वे प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया गया।
पत्रिका ने राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अपनी निर्भीक पत्रकारिता के दम पर पाठकों में पैठ बनाई है। धारदार खबरों के साथ-साथ जनसरोकारों से जुड़े कामों को लेकर भी पत्रिका की अलग पहचान है। इन आंकड़ों ने यह भी साबित किया है कि पाठक अवसरवादी पत्रकारिता को नकारते हुए मूल्य आधारित एवं सकारात्मक पत्रकारिता को समर्थन देते हैं। राजस्थान पत्रिका समूह हमेशा अपने पाठकों केे हितों की लड़ाई लड़ता रहा है। चाहे इसके लिए उसे सरकारों का कोपभाजन ही क्यों नहीं बनना पड़ा हो? सरकारों के अविवेकपूर्ण फैसलों की खिलाफत करते हुए पत्रिका जिस तरह से निर्भीकता से टक्कर ले रही है वह सबके सामने हैं।
राजस्थान में सरकार जिस तरह से भ्रष्ट राजनेताओं व नौकरशाहों को बचाने के लिए काला कानून लेकर आई उसके खिलाफ भी पत्रिका के रुख को पाठकों ने अपार समर्थन दिया है। इसके लिए पत्रिका ने न तो विज्ञापनों की परवाह की और न ही अन्य प्रलोभनों की। इसी के परिणामस्वरूप राजस्थान में पत्रिका के आसपास कोसों तक कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है। अपनी यह सफलता हम अपने पाठकों को ही समर्पित करते हैं क्योंकि उनके सहयोग से ही यह इतिहास रचा गया है।