
जयपुर। दवाओं पर भारी छूट का प्रचार करने वाले दवा कारोबारी अब राजस्थान फार्मेसी काउंसिल के निशाने पर आ गए हैं। काउंसिल ने मेडिकल स्टोर संचालकों की ओर से अपने प्रतिष्ठानों के प्रमुख स्थानों पर दवाओं पर भारी डिस्काउंट के बोर्ड लगाने और सोशल मीडिया के जरिए छूट व रियायत का प्रचार करने पर आपत्ति जताई है। काउंसिल ने इसे फार्मेसी एक्ट 1948 तथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। कार्रवाई की स्थिति में संबंधित फार्मासिस्ट का पंजीकरण निलंबित या रद्द किया जा सकता है और मेडिकल स्टोर भी डिफॉल्टर घोषित किया जा सकता है।
राजस्थान फार्मेसी काउंसिल की ओर से 23 जुलाई 2026 को जारी सार्वजनिक सूचना में कहा गया है कि उपभोक्ताओं और मरीजों को दवाएं खरीदने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा अपने परिसर में प्रमुख स्थानों पर छूट संबंधी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी दवाओं पर छूट और रियायत का प्रचार किया जा रहा है। काउंसिल ने पंजीकृत फार्मासिस्टों से ऐसी गतिविधियों पर आपत्ति जताने की अपेक्षा की है।
काउंसिल ने कहा है कि कुछ बड़े कारोबारी अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति के कारण दवाओं पर इस तरह के विज्ञापन करते हैं, जिससे छोटे दवा दुकानदारों के साथ अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होती है। काउंसिल ने ऐसी गतिविधियों को प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के अनुसार गंभीर माना है और कहा है कि इसका राज्य व देश के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा यह जनहित के विरुद्ध है। जयपुर केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नवीन सांघी और प्रवक्ता अजय अग्रवाल ने कहा कि कॉरपोरेट और ऑनलाइन कंपनियों की ओर से दी जा रही अनुचित छूट के कारण हजारों छोटे केमिस्टों के सामने कारोबार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई थी। उन्होंने कहा कि दवाओं की बिक्री में इस तरह की प्रतिस्पर्धा पर पूरे देश में प्रभावी नियंत्रण होना चाहिए।
इधर, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में लाभार्थियों को समय पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में लगभग दो माह से आरजीएचएस के अंतर्गत कार्य नहीं करने तथा लाभार्थियों को दवाइयां उपलब्ध नहीं कराने वाली 215 निजी फार्मेसियों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद किया गया है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस में दवा वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। लंबे समय से दवा उपलब्ध नहीं कराने वाली फार्मेसियों को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। असंतोषजनक उत्तर तथा कारण बताओ नोटिस का उत्तर प्रस्तुत करने में विफल रहने के कारण संबंधित फार्मेसियों का टीएमएस निलंबित किया गया है। जिनमें जयपुर में सर्वाधिक 39 फार्मेसियों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद किया गया है।