
डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया के खुले मंच पर भी यह उतनी ही जरूरी हो गई है। राजस्थान पुलिस ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, रोजाना जाने वाले रास्ते या लाइव लोकेशन वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि यह जानबूझकर या अनजाने में साइबर अपराधियों और असामाजिक तत्वों को न्योता देने जैसा हो सकता है। ध्यान रखें आपकी ओर से शेयर की गई तस्वीरें बाल सुरक्षा के लिए Cyber Morphing जैसे गंभीर खतरे पैदा कर सकती हैं।
अपराधी सोशल मीडिया (जैसे Instagram, Facebook) से किसी व्यक्ति की सामान्य या सार्वजनिक तस्वीर डाउनलोड करते हैं। एडिटिंग टूल्स की सहायता से चेहरे को काटकर किसी अश्लील या फर्जी फोटो-वीडियो में जोड़ दिया जाता है। लाइटिंग, रंग और किनारों को इस तरह मिलाया जाता है कि आम आदमी को वह तस्वीर बिल्कुल असली लगे।
• ब्लैकमेलिंग : मॉर्फ की हुई अश्लील तस्वीरें दिखाकर पीड़ितों से पैसे की मांग करना या उन्हें डराना-धमकाना।
• सेक्स्टॉर्शन : पैसों या अश्लील सामग्री के लिए दबाव बनाना।• प्रतिष्ठा को नुकसान: समाज में गलत छवि पेश करना और मानसिक तनाव देना।
• फर्जी प्रोफाइल: आपके नाम से गलत या धोखाधड़ी वाले अकाउंट बनाकर दूसरों को ठगना।
राजस्थान पुलिस के आधिकारिक हैंडल पर जारी पोस्ट में साफ कहा गया है कि ‘लाइक्स’ और ‘कमेंट्स’ की होड़ में बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी और सुरक्षा को दांव पर न लगाएं। तस्वीरें पोस्ट करने से पहले थोड़ा रुकें, प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें और लोकेशन टैग जरूर हटाएं। थोड़ी सी समझदारी और सतर्कता बच्चे का भविष्य सुरक्षित रख सकती है।
पुलिस ने याद दिलाया कि संदेहास्पद स्थिति में घबराएं नहीं। तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। WhatsApp नंबर 9256001930, 9257510100 या आधिकारिक पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस का संदेश साफ है - आइए मिलकर राज्य के हर बच्चे के लिए सुरक्षित माहौल बनाएं।
स्कूल यूनिफॉर्म और आईडी कार्ड से बच्चे का स्कूल, क्लास और पहचान आसानी से पता चल जाती है। रास्ते और लाइव लोकेशन से अपराधी उसके मूवमेंट ट्रैक कर सकते हैं। इससे स्टॉकिंग, अपहरण या ऑनलाइन उत्पीड़न का खतरा बढ़ जाता है।
राजस्थान में सोशल मीडिया फोटो के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। एआई डीपफेक तकनीक से वर्चुअल किडनैपिंग स्कैम में परिवारों की फोटो इस्तेमाल कर फिरौती मांगी गई। कई नाबालिग लड़कियां सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के संपर्क में आने के बाद लापता हुईं। जयपुर, जोधपुर सहित कई जिलों में साइबर क्राइम पोर्टल पर ऐसी शिकायतें दर्ज हुई हैं। पुलिस ने सीएसएएम (बाल यौन शोषण सामग्री) के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें हजारों नंबर और अकाउंट ब्लॉक किए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सावधानी का क्षेत्र भी है। राजस्थान पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है ताकि माता-पिता और बच्चे दोनों सतर्क रहें। थोड़ी सी सावधानी कई बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सकती है। याद रखें- आपकी सतर्कता ही बच्चों की सबसे बड़ी सुरक्षा है।