जयपुर

Rajasthan Politics : ‘महिला आरक्षण बिल’ गिरने पर गरमाई सियासत, गहलोत-पायलट से लेकर सीएम भजनलाल-वसुंधरा तक के तीखे तेवर

लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 के गिरने के बाद राजस्थान के सियासी गलियारों में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

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Apr 18, 2026
Top Political leaders of Rajasthan
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दिल्ली की संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 के पारित न होने की गूंज राजस्थान तक पहुँच गई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जिस तरह से विपक्षी दलों ने विरोध किया और बिल गिर गया, उसने राजस्थान की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल दिया है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण के खिलाफ 'घमंडिया गठबंधन' का अपराध बता रही है, तो कांग्रेस इसे परिसीमन के नाम पर डराने और विपक्ष को फंसाने की साजिश करार दे रही है।

हर बूथ पर मिलेगा मुंहतोड़ जवाब : CM भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आज लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। उन्होंने कांग्रेस, सपा, TMC और DMK को घेरते हुए कहा, "इन परिवारवादी पार्टियों ने सत्ता के लालच में नारी शक्ति का अपमान किया है। यह आक्रोश अब थमेगा नहीं, 2029 तो क्या, आने वाले हर चुनाव में देश की महिलाएं इस विश्वासघात का जवाब देंगी।" मुख्यमंत्री ने इसे सीधे तौर पर 'नारी शक्ति के अधिकारों पर प्रहार' बताया है।

यह भाजपा की 'मालाफाइड इंटेंट' थी : अशोक गहलोत

विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए। गहलोत ने कहा कि मोदी और शाह को पता था कि विपक्ष के बिना यह बिल पास नहीं होगा, फिर भी उन्होंने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई।

गहलोत ने आरोप लगाया, "यह बिल खतरनाक था, क्योंकि इसके पीछे परिसीमन का डर था। असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह विपक्ष को टारगेट कर परिसीमन हुआ, उस पर कोई भरोसा नहीं कर सकता। भाजपा ने जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाईं ताकि बिल गिर जाए और सारा ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके।"

यह करोड़ों महिलाओं के सपनों पर आघात : वसुंधरा राजे

वरिष्ठ भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नारी राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और आज जो हुआ वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राजे ने कहा, "एक तरफ पीएम मोदी महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बना रहे थे, वहीं इंडी गठबंधन के महिला विरोधी दल इसे रोक रहे थे। देश की नारी जागरूक है और अपने वोट की शक्ति से उन ताकतों को जवाब देगी जिन्होंने उनके सपनों को रोकने का प्रयास किया है।"

बिल में कई गंभीर खामियां थीं : सचिन पायलट

राजस्थान की राजनीति पर क्या होगा असर?

राजस्थान में महिला मतदाताओं का साइलेंट वोट बैंक हमेशा से निर्णायक रहा है।

  1. भाजपा का नैरेटिव: भाजपा अब इस मुद्दे को गाँव-गाँव ले जाकर कांग्रेस को 'महिला विरोधी' साबित करने की कोशिश करेगी।
  2. कांग्रेस का डिफेंस: कांग्रेस 'जातिगत जनगणना' और 'असमान परिसीमन' के मुद्दों को उठाकर ओबीसी और दक्षिण भारत के हितों की रक्षा का कार्ड खेल रही है।
  3. सियासी तापमान: विधानसभा चुनावों के बीच इस तरह के बड़े संवैधानिक विधेयक का गिरना आने वाले उपचुनावों और भविष्य के चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।
Published on:
18 Apr 2026 10:41 am