Nepotism in Politics: प्रदेश की सियासत में अब नेताओं के पुत्रों की एंट्री भी हो गई है। राजसमंद विधायक के पुत्र से जुड़े एक प्रकरण के बहाने पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने तीन दिन पहले सीएम, डिप्टी सीएम और मंत्रियों को अपने पुत्रों को सरकार से दूर रखने की सलाह दी थी। भाजपा के बड़े नेताओं ने गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले वे अपने खुद के पुत्र के लिए किए गए कार्याें के बारे में सोच लें।
Nepotism in Politics: प्रदेश की सियासत में अब नेताओं के पुत्रों की एंट्री भी हो गई है। राजसमंद विधायक के पुत्र से जुड़े एक प्रकरण के बहाने पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने तीन दिन पहले सीएम, डिप्टी सीएम और मंत्रियों को अपने पुत्रों को सरकार से दूर रखने की सलाह दी थी। अब इस मामले में भाजपा भी मुखर हो गई है और गहलोत के पुत्र को भी इस सियासत में खींच लिया है।
भाजपा के बड़े नेताओं ने गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा है कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले वे अपने खुद के पुत्र के लिए किए गए कार्याें के बारे में सोच लें। उन्होंने तमाम प्रयास कर लिए, फिर भी उनका पुत्र राजनीति में एडजस्ट नहीं हो सका।
गौरतलब है कि पूर्व सीएम गहलोत पिछले कई दिनों से अपने समय में शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की धीमी गति को लेकर सोशल मीडिया पर ‘इंतजार शास्त्र’ नाम से लगातार पोस्ट कर रहे हैं, जिससे भाजपा में भी सियासत तेज है। प्रदेश में नेता पुत्रों की दखल की बातें पिछली सरकार में भी आती रही हैं, ऐसे में प्रदेश में अब धीरे-धीरे यह बहस का मुद्दा बनने लगा है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मंत्रियों के बेटों को पता नहीं किस प्रकार प्रोत्साहन दिया जा रहा होगा। मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और मंत्रियों को चाहिए कि वे अपने बेटों को सरकार से दूर रखें। इससे सरकार का भला होगा। बेटों को नजदीक लाओगे तो बिगड़ जाएगा। अच्छे संस्कार घर के अंदर दो। अगर आप उसे सरकार के पास रखोगे, तो आपको मालूम नहीं पड़ेगा कि वो आपको कब बदनाम करवा दे। बदनामी आपकी होगी, सरकार की होगी, मंत्रियों की होगी, मुख्यमंत्री की होगी। राजस्थान में क्या-क्या चर्चाएं चलती हैं, ये बातें मुख्यमंत्री तक पहुंचती नहीं हैं। मैं उनको सलाह देना चाहूंगा कि बेटों को दूर रखो।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीन दिन पहले गहलोत का नाम लिए बिना कहा था कि खोखली जादूगरी का झूठ केवल भ्रम पैदा करता है। याद रहे भ्रष्टाचार में लिप्त हर एक की बारी आएगी। सीएम ने कहा कि एक ‘इंतजार शास्त्र’ लगा रखा है। ये इंतजार शास्त्र नहीं है, ये झूठ का शास्त्र भी है। जेजेएम में भ्रष्टाचार किया है। पूर्व मंत्री और अधिकारी जेल में लगातार जा रहे हैं और अभी सूची लंबी है। जिन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी की है। भ्रष्टाचार किया है, उसको बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने शनिवार को यहां सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि गहलोत ‘हकीकत शास्त्र’ से कोसों दूर हैं और केवल ‘इंतजार शास्त्र’ के माध्यम से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। इनके समय सिस्टम को लूटा गया, व्यवस्थाओं का दम घोंटा गया, कोरोना जैसी आपदा में भी अवसर बना लिया गया।
मंत्रियों को पुत्र मोह की नसीहत देने वाले गहलोत स्वयं वैभव गहलोत के मोह में फंसकर रह गए। गहलोत ने अपने पुत्र को अन्य नेताओं का हक मारकर जोधपुर, जालौर से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। आरसीए चुनाव में भी उन्होंने अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए वरिष्ठ नेता रामेश्वर डूडी का अपमान किया और आज वे मंत्रियों को पुत्र मोह से दूर रहने की नसीहत दे रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत पुत्र मोह से ग्रसित हैं। गहलोत ने अपने बेटे को आगे बढ़ाने के कई प्रयास किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। खुद तो गुड़ खाएं और दूसरों को गुड़ छोड़ने की सलाह दें। यह ठीक नहीं। सलाह उसी की प्रभावी होती है, जो खुद उस पर अमल करे।