
पूर्वी राजस्थान के पानी के संकट को हमेशा के लिए खत्म करने और मरुधरा के एक बड़े हिस्से में जल क्रांति का सूत्रपात करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'रामजल सेतु लिंक परियोजना' (Ram Jal Setu Link Project) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस बड़ी परियोजना के सभी प्रगतिरत कार्यों को पूरी प्राथमिकता के आधार पर तय समय-सीमा से पहले ही पूरा किया जाए, ताकि पूर्वी राजस्थान के लाखों परिवारों और किसानों को इसका सीधा लाभ जल्द से जल्द मिल सके। मुख्यमंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणा से मूर्त रूप लेने जा रही यह ऐतिहासिक परियोजना केवल पानी की एक सामान्य स्कीम नहीं है, बल्कि यह पूर्वी राजस्थान के समग्र सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है।
बता दें कि इस प्रोजेक्ट को लेकर जनवरी 2024 में मध्यप्रदेश सरकार के साथ एमओयू (MOU) हुआ और बाद में 17 December 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्र सरकार, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता संपन्न हो सका था, जो अब 2026 में धरातल पर पूरी तरह साकार हो रहा है।
राजस्थान सरकार ने इस पूर्ववर्ती जल परियोजना के दायरे को व्यापक स्वरूप देते हुए इसे अब 'संशोधित रामजल सेतु लिंक परियोजना' के रूप में नया जीवन दिया है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 90,000 करोड़ रुपये तय की गई है। इस योजना के प्रथम चरण के काम पूरे होते ही राजस्थान के 17 महत्वपूर्ण जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी के लिए पीने के मीठे पानी की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही, इन क्षेत्रों में हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और स्थानीय उद्योगों के विकास के लिए भी भरपूर और पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि धरातल पर इस योजना के तहत वर्तमान में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य बेहद तेज गति से चल रहे हैं।
विभाग के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि 'नवनेरा बैराज' और 'ईसरदा बांध' का मुख्य निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। इसके अलावा, रामगढ़ बैराज और महलपुर बैराज के ओवरफ्लो भाग का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत साइट पर लगभग 600 क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की दर से कंक्रीटिंग का भारी काम किया जा रहा है।
इस पूरी परियोजना के पहले चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत लगभग 2,330 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 'चंबल एक्वाडक्ट' का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। यह विशाल एक्वाडक्ट भौगोलिक रूप से एक तरफ कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव को जोड़ेगा, तो दूसरी तरफ बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव को आपस में कनेक्ट करेगा। इसके मुख्य ढांचे के लिए तय 5,060 पाइलों में से लगभग 3,700 पाइलों का फाउंडेशन कार्य पूरा किया जा चुका है।
इस एक्वाडक्ट के माध्यम से नवनेरा बैराज के पानी को लिफ्ट करके मेज नदी में छोड़ा जाएगा, जहां से विभिन्न फीडर प्रणालियों द्वारा पानी को गलवा बांध, बीसलपुर और ईसरदा बांध तक ट्रांसफर किया जाएगा। इस विशाल संरचना के बनने से स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन के लिए एक बेहतरीन अतिरिक्त सड़क मार्ग भी मिल जाएगा।
रामजल सेतु लिंक परियोजना के तहत राजस्थान के अलग-अलग प्रमुख बांधों और जलाशयों को आपस में जोड़ने के लिए फीडर नहरों और अंडरग्राउंड पाइपलाइनों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है:
नवनेरा से मेज एनीकट: नवनेरा बैराज से मेज एनीकट तक कुल 19 किलोमीटर लंबी फीडर नहर बननी है, जिसमें से 8 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।
ईसरदा से बंध बारेठा (भरतपुर): ईसरदा से खुरा चैनपुरा होते हुए भरतपुर के ऐतिहासिक बंध बारेठा बांध तक पानी ले जाने के लिए लगभग 180 किलोमीटर लंबी फीडर नहर के निर्माण का काम शुरू हो चुका है और वर्तमान में हैड रेगुलेटर का काम प्रगति पर है।
बीसलपुर से मोर सागर (अजमेर): बीसलपुर बांध से मोर सागर कृत्रिम रिजर्वायर तक पानी डायवर्ट करने के लिए बीसलपुर बांध पर हैड रेगुलेटर और लाम्बा हरिसिंह बांध पर आधुनिक पंप हाउस बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
ईसरदा से रामगढ़ बांध (जयपुर): राजधानी जयपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले रामगढ़ बांध को दोबारा भरने के लिए ईसरदा बांध से पाइपलाइन बिछाने हेतु रूट अलाइनमेंट का काम अपने अंतिम चरण में है, जिसे जल्द ही फाइनल कर काम शुरू किया जाएगा।
जयसमंद (अलवर) और ब्राह्मणी बैराज: खुरा चैनपुरा से अलवर के जयसमंद बांध तक पानी पहुंचाने के लिए अलाइनमेंट टेस्ट अंतिम चरण में है, वहीं ब्राह्मणी बैराज के लिए अलाइनमेंट तय होने के बाद वन भूमि प्रत्यावर्तन (Forest Clearance) और भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
परियोजना के तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन स्थानीय ग्रामीण परिवारों के प्रति बेहद संवेदनशीलता दिखाई जिनकी जमीनें इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देश दिए कि बांध या नहर निर्माण से प्रभावित होने वाले एक-एक परिवार के पुनर्वास और मुआवजे का काम पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
सीएम ने कहा कि किसी भी गरीब किसान या ग्रामीण को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है।