
Sawai Mansingh Stadium - File PIC
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरण नियमों और ग्राउंडवाटर (भूजल) के अनियंत्रित इस्तेमाल से जुड़े एक गंभीर मामले में जयपुर स्थित सवाई मानसिंह स्टेडियम (SMS) सहित देश के 3 क्रिकेट स्टेडियमों पर बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की खेल गतिविधियों के आयोजन करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने यह अंतरिम आदेश शुक्रवार, 10 जुलाई को जारी किया, जिसमें स्टेडियम अथॉरिटी द्वारा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देशों की लगातार की जा रही अनदेखी को मुख्य आधार बनाया गया है। राजस्थान के खेल जगत और जयपुर के स्थानीय नागरिकों के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है क्योंकि आने वाले समय में इस मैदान में होने वाले कई महत्वपूर्ण मैचों के आयोजन पर अब अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की अध्यक्षता वाली मुख्य पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि इन स्टेडियमों को बार-बार चेतावनी दी जा रही थी। ट्रिब्यूनल और सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (CGWA) द्वारा बार-बार कानूनी नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम प्रशासन ने भूजल निष्कर्षण (Groundwater Extraction) और संरक्षण से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और रिपोर्ट समय पर सबमिट नहीं की थीं। अधिकारियों के इसी ढुलमुल रवैये से नाराज होकर ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए इस अंतरिम प्रतिबंध का आदेश जारी कर दिया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का यह कड़ा आदेश केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के दो अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट मैदान भी इस कार्रवाई की जद में आए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुसार, जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम और मुंबई के प्रसिद्ध डॉ. डी वाई पाटिल (Dr D Y Patil) स्टेडियम पर भी यह पाबंदी समान रूप से लागू की गई है।
जब तक ये स्टेडियम प्रशासन पर्यावरण मानदंडों को पूरा करने की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश नहीं करते और ट्रिब्यूनल से विशेष अनुमति प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक इन तीनों मैदानों पर किसी भी बड़े खेल टूर्नामेंट या मैच का आयोजन नहीं हो सकेगा।
यह पूरा कानूनी मामला असल में एक एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन से जुड़ा हुआ है, जिसे क्रिकेट ग्राउंड्स के रखरखाव और उनकी हरी घास को बनाए रखने के लिए पीने योग्य साफ पानी और कीमती ग्राउंडवाटर की बर्बादी को रोकने के लिए दायर किया गया था।
एनजीटी ने अपने पुराने आदेशों में सभी राज्य क्रिकेट संघों और खेल विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे-
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) वाटर: मैदान की हरी घास और आउटफील्ड की सिंचाई के लिए केवल ट्रीटेड सीवेज वाटर का ही उपयोग करेंगे।
रेनवाटर हार्वेस्टिंग: स्टेडियम परिसरों के भीतर बड़े स्तर पर वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) सिस्टम इंस्टॉल करेंगे ताकि जमीन का वाटर लेवल बना रहे।
कंजर्वेशन नॉर्म्स: भूजल संरक्षण के सभी तय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने अपनी विस्तृत टिप्पणी में देश के कई हिस्सों में तेजी से बढ़ रहे गंभीर जल संकट और सूखे के हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने साफ शब्दों में कहा कि वह देश के सभी प्रतिष्ठित खेल संगठनों और स्टेडियम प्रबंधन से यह अपेक्षा करता है कि वे पर्यावरण नियमों का सम्मान करें और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में प्रशासन का पूरा सहयोग करें।
कोर्ट ने अब सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (CGWA) को अधिकृत किया है कि वह इन स्टेडियमों से मिलने वाले जवाबों के आधार पर एक बिल्कुल फ्रेश कंप्लायंस रिपोर्ट तैयार करे। एनजीटी ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 अगस्त 2026 तय की है, तब तक यह प्रतिबंधात्मक आदेश पूरी तरह से प्रभावी रहेगा।
Updated on:
11 Jul 2026 09:59 am
Published on:
11 Jul 2026 09:59 am
