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Jaipur Population : 50 साल में 5 गुना फ़ैल गया जयपुर- 42 लाख बढ़ी आबादी, आंकड़ों के साथ जानें Inside Story

Jaipur में पिछले 5 दशकों में आबादी 6.15 लाख से बढ़कर 48 लाख पार हो चुकी है। तेजी से फैलते शहर में बीसलपुर बांध पर पानी का दबाव, ट्रैफिक जाम और सीवरेज की बड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
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Jaipur Population Expansion Infrastructure Crisis Traffic Water Shortage Reality

AI PIC

कभी परकोटे तक सीमित रहने वाला जयपुर पांच दशक में पांच गुना फैलकर 6.15 लाख आबादी से बढ़कर 48 लाख तक पहुंच चुका है। शहर का दायरा 10 किलोमीटर से बढ़कर 50 किलोमीटर हो गया है। बीते ढाई दशक में तो शहर भीड़ से भर गया, लेकिन नए उपनगरों में सुविधाओं संसाधनों की दरकार है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उच्च शिक्षा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सीवरेज, पेयजल, बिजली जैसी सुविधाएं यथावत हैं। पूरे शहर को पेयजल की सरकारी सुविधा नहीं है। मानसरोवर, मुहाना, जगतपुरा, वैशाली नगर, सिरसी रोड और विद्याधर नगर जैसे नए इलाके तेजी से विकसित हुए, लेकिन आबादी की रफ्तार के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। नतीजा यह है कि राजधानी आज बढ़ते दबाव, सार्वजनिक परिवहन की कमी और सीबर-ड्रेनेज जैसी समस्याओं से जूझ रही है।

50 लाख का जयपुर, 3-4 लाख गणना से बाहर

जयपुर शहर की वर्तमान आबादी 47.87 लाख है। 3 से 4 लाख गणना में नहीं है। बढ़ती आबादी के साथ हर साल नए बिजली और पानी के कनेक्शन जुड़ रहे हैं, हजारों नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं लेकिन सड़कों का चौड़ीकरण, जल स्रोतों का विस्तार, सरकारी अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग जैसी सुविधाएं उसी गति से नहीं बढ़ीं।

कदम-कदम पर भीड़ का दबाव

पेयजल-बिजली: पेयजल व्यवस्था बीसलपुर बांध पर निर्भर है। हर गर्मी में नए क्षेत्रों में पानी की मांग बढ़ने के साथ संकट गहराता है। नए ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) बनने की रफ्तार धीमी है, जिससे कई इलाकों में लो-वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। पीआरएन, खो नागोरियान और आगरा रोड क्षेत्र की कॉलोनियां इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं : संपूर्ण सुविधा युक्त एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध 9 अस्पताल पुराने शहर के दायरे में ही है। डेढ़ दशक पहले प्रताप नगर में आरयूएचएस बनाया गया लेकिन वहां अभी भी सभी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं नहीं हैं। एसएमएस, जयपुरिया, महिला चिकित्सालय, कांवटिया और जनाना अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ रहा है।

पार्क, खेल मैदान : नगर निगम का क्षेत्रफल करीब 780 वर्ग किलोमीटर और जेडीए का क्षेत्र लगभग 6000 वर्ग किलोमीटर है। पार्कों की संख्या बढ़ी है, लेकिन बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान कम हैं। कई बड़े पार्क पिकनिक स्थल बनकर रह गए हैं।

सार्वजनिक परिवहन: 1200 सिटी बसों की जरूरत वाले शहर में मात्र 200 बसों से काम चलाया जा रहा है। बाहरी इलाकों में दिनभर में एक-दो बसें ही पहुंचती हैं। मेट्रो का दायरा भी अभी शहर के सीमित हिस्से तक ही है। इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों, ट्रैफिक, पेयजल, सड़क और सीवर नेटवर्क पर सबसे अधिक दबाव है, जबकि नई कॉलोनियों में अब भी कई सुविधाओं का अभाव है।

लेकिन उतनी तेजी से नहीं बढ़े...

पेयजल तंत्र
सरकारी अस्पताल
सार्वजनिक परिवहन
चौड़ी सड़कें
पार्किंग
सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क
हरित क्षेत्र और खेल मैदान

जनसंख्या घनत्व के हिसाब से स्थिति

शहरप्रति वर्ग किमी जनसंख्या
जयपुर6,400
पुणे6,000-6,500
अहमदाबाद8,000-8,500
बेंगलुरु8,500-9,000

आबादी बढ़ेगी तो बढ़ेगा कार्बन दबाव

विभिन्न रिपोर्ट से पता चला कि जयपुर का प्रति व्यक्ति कार्बन फुटप्रिंट 1.5 से 3.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य प्रतिवर्ष आंका गया है। यह भारत के औसत (करीब 2.2 टन) और विश्व औसत (करीब 4 टन) के बराबर या उससे कम है। जबकि, अमेरिका में यह 16-19 टन प्रति व्यक्ति है। जयपुर का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम है। लो-कार्बन विकास की योजना बनाना आज की बड़ी आवश्यकता है।

जयपुर के रफ्तार की तस्वीर

सरकारी अस्पतालों में बेड : 6579
सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं (पंजीकृत मरीज) : 1.04 करोड़ (सालाना)
निःशुल्क जांच (कुल मरीज) : 6017967 (सालाना)
निःशुल्क दवा (कुल मरीज) : 5328682 (सालाना)
स्वच्छता रैंकिंग 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में
नगर निगम हैरिटेज (तत्कालीन) : 20 रैंक
नगर निगम ग्रेटर (तत्कालीन) : 16 रैंक
जन्म दर : 22.5 (1000 लोगों पर एक वर्ष में कुल जीवित जन्म)
मृत्यु दर : 5.7 (1000 जनसंख्या पर एक वर्ष में मृत्यु)
जन्म पर लिंगानुपात : 850
सड़कों की कुल लंबाई : 7391.03 किलोमीटर
बिजली उपभोक्ता (घरेलू) : 5506463

जनता की बात

शहर का विस्तार तो बहुत तेजी से हुआ है, लेकिन उसी रफ्तार से सड़क, सीवर, पेयजल और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं नहीं बढ़ीं। नई कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को आज भी रोजमर्रा की मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इस पर जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है। -रणवीर नाथावत, जगतपुरा

पहले शहर छोटा था तो सुविधाएं आसानी से मिल जाती थीं। अब जनसंख्या बढ़ने के साथ स्कूल, अस्पताल, पार्क और सार्वजनिक परिवहन की जरूरत भी बढ़ी है। नए इलाकों में रहने वाले लोगों को आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। -विजया गौतम, मानसरोवर

आबादी के अनुसार बने भावी योजना: पाराशर

जयपुर का विस्तार योजनाबद्ध होना बहुत जरूरी है। आबादी लगातार बढ़ रही है। शहर का भौगोलिक आकार तो पांच दशक में पांच गुना बढ़ गया, लेकिन जलापूर्ति, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और सड़क नेटवर्क उसी अनुपात में विकसित नहीं हुए। अगले दो-तीन दशकों की आबादी को ध्यान में रखकर इन्फ्रा की अग्रिम योजना बनानी होगी, अन्यथा राजधानी में जीवन की गुणवत्ता लगातार प्रभावित होती जाएगी। चंद्रशेखर पाराशर, सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक