
विजय शर्मा
जयपुर। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लगातार तीन सत्र से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने का असर अब छात्र राजनीति के भविष्य पर दिखाई देने लगा है। कैंपस में अध्यक्ष, महासचिव या अन्य पदों पर चुनाव लड़कर राजनीतिक सफर शुरू करने की तैयारी करने वाले कई छात्र नेताओं को मौका नहीं मिला तो उन्होंने सियासत का मैदान ही बदल लिया है।
हाल ही हुए निकाय चुनाव में कई पूर्व छात्र नेताओं ने पार्षद का चुनाव लड़ा। कुछ जीतकर नगर निकायों में पहुंचे तो कुछ को हार का सामना करना पड़ा। अब आगामी पंचायत चुनावों को लेकर भी छात्र राजनीति से निकले युवाओं की सक्रियता बढ़ गई है। कोई जिला परिषद सदस्य तो कोई पंचायत समिति सदस्य और सरपंच बनने की तैयारी में जुटा है।
मानवेन्द्र सिंहः राजस्थान कॉलेज के छात्र नेता रहे, जयपुर नगर निगम पार्षद बने।
नेहा शर्माः पत्रकारिता विवि. में संयुक्त सचिव रहीं, थानागाजी नगर पालिका पार्षद बनीं।
रमेश भाटीः राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय और एनएसयूआइ के निवर्तमान राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। जयपुर नगर निगम चुनाव में पत्नी को चुनाव लड़वाया, पत्नी पार्षद बनीं।
रघुनाथ विश्नोईः एबीवीपी से जुड़े छात्र नेता, निकाय चुनाव में पार्षद निर्वाचित हुए।
विजय पाल कुड़ीः राजस्थान विश्वविद्यालय में एनएसयूआइ प्रभा रहे, सीकर जिला परिषद से प्रयास
धर्मवीर लांबाः एनएसयूआइ के राष्ट्रीय सचिव रहे, झुंझुनूं पंचायत समिति से कोशिश जारी।
महेश सामोताः राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता रहे, सीकर जिला परिषद से प्रयास।
रामस्वरूप ओलाः पूर्व शोध छात्रसंघ अध्यक्ष, जयपुर जिला परिषद।
राजेन्द्र चौधरीः एनएसयूआइ जिला अध्यक्ष रहे, दूदू से प्रयास कर रहे।
चेतन यादवः राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता रहे, जयपुर जिला परिषद से प्रयास।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के हाल ही चुनाव हुए, जबकि राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव पर सरकार की रोक जारी है। इससे पहले सत्र 2022-23 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इसके बाद से कैंपस में चुनावी शोर बंद है। चुनाव की मांग को लेकर कई बार छात्र नेताओं की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं। छात्र नेताओं की मांग है कि सरकार छात्रसंघ चुनाव करवाए।
छात्रसंघ चुनाव कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। अगर सरकार छात्रसंघ चुनाव नहीं कराएगी तो युवा राजनीति में कैसे सक्रिय होंगे। सरकार को चुनाव कराने चाहिए।
-प्रताप खाचरियावास, पूर्व मंत्री
छात्रसंघ चुनाव जल्द से जल्द होने चाहिए। हमने भी कई बार सरकार से मांग की है। युवाओं की भागीदारी राजनीति में जरूरी है और छात्रसंघ चुनाव ही पहली सीढ़ी है।
-अशोक लाहोटी, पूर्व महापौर