
Rajasthan Government Doctors Legal Action: जयपुर: राजस्थान की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने ऐसे 678 चिकित्सकों की सूची जारी की है, जो स्थानांतरण या पदस्थापन के आदेश के बाद कार्यग्रहण नहीं करने अथवा लंबे समय से अनुपस्थित रहने के बावजूद ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं। विभाग ने इन चिकित्सकों को अंतिम अवसर देते हुए अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि चिकित्सा विभाग अप्रैल महीने से अब तक ऐसे चिकित्सकों को तीसरी बार चेतावनी जारी कर चुका है। इसके बावजूद करीब 678 चिकित्सकों ने अब तक कार्यग्रहण नहीं किया है। अब विभाग ने इनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
निदेशालय की ओर से जारी नोटिस के साथ 678 चिकित्सकों की सूची भी संलग्न की गई है। सूची में चिकित्सकों के नाम, पद, योग्यता, जन्मतिथि और आरपीएससी से संबंधित विवरण दर्ज हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ राजस्थान सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने उन चिकित्सकों को लेकर भी सख्ती के संकेत दिए हैं, जिन्होंने सेवारत कोटे से पीजी पूरी की है। ऐसे मामलों में बांड की शर्तों के अनुसार राशि की वसूली की जाएगी। साथ ही राजस्थान मेडिकल काउंसिल से पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
बड़ी संख्या में चिकित्सकों के लंबे समय से ड्यूटी से बाहर रहने के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि इन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के दौरान मरीजों के इलाज की व्यवस्था किस तरह संचालित होती रही और उनकी जगह चिकित्सकीय सेवाओं का जिम्मा किसके भरोसे रहा।
निदेशक जनस्वास्थ्य, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग डॉ. रविप्रकाश शर्मा ने बताया कि कई नोटिस जारी करने के बाद भी करीब 678 चिकित्सकों ने कार्यग्रहण नहीं किया है। ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।