Road Safety India: सड़क सुरक्षा और बस सेवाओं में बड़ा बदलाव, PPP मॉडल पर विकसित होंगे नए बस पोर्ट और तकनीकी सुधार। राजस्थान परिवहन विभाग की बड़ी बैठक: रोडवेज, टेस्ट ट्रैक और सुरक्षा व्यवस्था में तेज सुधार के निर्देश।
Driving Test Track Automation: जयपुर. राजस्थान में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग तथा राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की उच्च स्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में सड़क सुरक्षा, बस सेवाओं के विस्तार और तकनीकी सुधारों की प्रगति की समीक्षा की गई।
सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक्स को पूरी तरह ऑटोमेटेड किया जाएगा, जिससे लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आएगी। वर्तमान में 14 स्थानों पर ऑटोमेटेड टेस्ट ट्रैक संचालित हो रहे हैं, जबकि शेष स्थानों पर कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही गलत स्लॉट बुकिंग को रोकने के लिए पिनकोड आधारित मैपिंग व्यवस्था भी लागू की जा रही है।
परिवहन सुधार के तहत अजमेर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर और बीकानेर सहित 10 जिला मुख्यालयों पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधुनिक सुविधायुक्त बस पोर्ट विकसित किए जाएंगे। इन बस पोर्ट्स में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और इनके लिए निविदा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोडवेज बेड़े के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया है। बैठक में बताया गया कि 300 इलेक्ट्रिक बसों और 300 नई बसों की खरीद प्रक्रिया मिशन मोड पर चल रही है। इससे राज्य में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सशक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव आएगा।
सड़क सुरक्षा को लेकर भी सरकार गंभीर नजर आई। अब तक 3 हजार से अधिक चिकित्सा कर्मियों को एडवांस लाइफ सपोर्ट और 15 हजार से अधिक नागरिकों को बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही पुलिस विभाग को आधुनिक ब्रेथ एनालाइजर, इंटरसेप्टर वाहन और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके अलावा “आपणी बस-राजस्थान रोडवेज” योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 357 मार्गों पर बस संचालन किया जा रहा है, जिनमें कई मार्गों पर 100 प्रतिशत से अधिक यात्री भार दर्ज किया गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि संपर्क पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण का औसत समय 18 दिनों से घटकर 11 दिन हो गया है, जबकि समाधान दर बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कुल मिलाकर यह बैठक राजस्थान के परिवहन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।