
जयपुर। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) को लेकर परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टर्स के बीच जारी विवाद अब आम लोगों की दिनचर्या पर भी असर डाल सकता है। प्रदेशभर के ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन चक्का जाम की घोषणा की है। ट्रांसपोर्टर्स का दावा है कि हड़ताल शुरू होते ही करीब 10 लाख ट्रकों के पहिए थम जाएंगे, जिससे राजस्थान सहित दूसरे राज्यों के बीच माल परिवहन प्रभावित होगा।
शनिवार को जयपुर में प्रदेशभर के ट्रांसपोर्ट संगठनों की बैठक में आंदोलन का फैसला लिया गया। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) को लेकर अब तक स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी नहीं की गई है। इसके चलते हजारों वाहनों के परमिट और फिटनेस नवीनीकरण का काम अटक गया है। वहीं ई-डिटेक्शन प्रणाली के जरिए लगातार चालान जारी होने से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
राजधानी जयपुर से प्रतिदिन करीब तीन हजार ट्रक विभिन्न राज्यों के लिए रवाना होते हैं और लगभग इतनी ही संख्या में ट्रक आवश्यक वस्तुएं लेकर शहर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि हड़ताल लंबी चली तो फल-सब्जियां, किराना, दूध एवं डेयरी उत्पाद, दवाइयां, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, औद्योगिक कच्चा माल और निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई बाधित होने पर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधि रामावतार मोर और उपेंद्र मित्तल ने आरोप लगाया कि वीएलटीडी लगाने के लिए केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को अधिकृत किया गया है। उनका कहना है कि ये कंपनियां एक डिवाइस के लिए करीब 30 हजार रुपये तक वसूल रही हैं, जबकि अन्य राज्यों में यही डिवाइस लगभग 3 हजार रुपये में उपलब्ध है। ट्रांसपोर्टर्स ने सरकार से अधिक कंपनियों को अनुमति देने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुरेश पूनिया ने कहा कि प्रदेश में प्रमाणित वीएलटीडी डिवाइस पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा विभागीय पोर्टल में तकनीकी समस्याओं के कारण परमिट और फिटनेस से जुड़े कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाती, तब तक ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और ई-चालान की प्रक्रिया रोकी जाए।
इस मुद्दे पर पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वीएलटीडी के नाम पर वाहन मालिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रही है। उनके मुताबिक पहले स्मार्ट मीटर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नाम पर लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा, अब वीएलटीडी के जरिए भी वाहन मालिकों पर नई आर्थिक जिम्मेदारी डाली जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो कांग्रेस ट्रांसपोर्टर्स और वाहन मालिकों के समर्थन में आंदोलन करेगी।
फिलहाल सोमवार से शुरू होने वाली इस हड़ताल पर व्यापारियों, उद्योग जगत और आम लोगों की नजरें टिकी हैं। यदि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका असर पूरे प्रदेश की सप्लाई चेन और बाजार व्यवस्था पर पड़ सकता है।