
जयपुर. दिवाली पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों को इस बार सफर के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। एक तरफ राजस्थान रोडवेज के पास पर्याप्त बसें नहीं है, वहीं दूसरी तरफ निजी बस ऑपरेटर्स ने त्योहार से पहले ही किराया बढ़ा दिया है। लंबी दूरी के रूटों पर रोडवेज की सीमित बसों और स्लीपर बसों की कमी के चलते यात्रियों को निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसका फायदा उठाकर निजी ऑपरेटर्स ने कई रूटों पर किराया 20 से 25 फीसदी तक बढ़ा दिया है, जबकि कुछ रूटों पर किराया दोगुना तक कर दिया गया है। परिवहन विभाग की प्रभावी निगरानी नहीं होने से यात्रियों को मनमाना किराया चुकाना पड़ सकता है।
निजी बसों में मनमाना किराया वसूले जाने पर यात्रियों के सामने शिकायत का भी संकट है। आरटीओ की ओर से इसके लिए कोई स्पष्ट शिकायत नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में अतिरिक्त किराया वसूले जाने के बावजूद यात्री शिकायत नहीं कर पाते। ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकटों पर अलग-अलग किराया वसूली की स्थिति में भी निगरानी जरूरी है। परिवहन विभाग की प्रभावी मॉनिटरिंग न होने का असर यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है।
त्योहारी सीजन में परिवहन विभाग को सिंधी कैंप के बाहर विशेष उड़नदस्ते तैनात करने चाहिए। ये टीमें निजी बसों के किराए, टिकट और यात्रियों से होने वाली वसूली की जांच करें। मौके पर ही शिकायत सुनने और कार्रवाई की व्यवस्था हो। यात्रियों की सुविधा के लिए शिकायत नंबर और हेल्पलाइन भी जारी की जाए।
रोडवेज के पास अपनी 2468 बसें हैं, जबकि 1036 बसें अनुबंध पर संचालित हो रही हैं। रोडवेज की बसें रोजाना औसतन 13.80 लाख किलोमीटर चलती हैं और इनमें करीब 8.50 लाख यात्री सफर करते हैं। प्रतिदिन औसतन 6.50 करोड़ रुपए आय होती है। बावजूद लंबी दूरी के यात्रियों की मांग के अनुरूप पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं हैं। अतिरिक्त बसों की व्यवस्था करना, ब्रेकडाउन कम कर उपलब्ध बसों का अधिकतम संचालन करना रोडवेज के लिए चुनौती होगी।
| शहर/रूट | तय किराया (₹) | बढ़ा किराया (₹) |
|---|---|---|
| लखनऊ | 800 | 1,500 |
| गोरखपुर | 1,200 | 2,500 |
| बनारस | 1,200 | 2,500 |
| आगरा | 350 | 500 |
| बिहार | 1,700 | 4,000 |
| अमृतसर | 1,300 | 2,200 |
| जम्मू | 1,800 | 3,500 |
| दिल्ली | 550 | 800 |
नोट: इसके अलावा राजस्थान के अन्य शहरों के लिए किराए में 200 से 300 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है।