
Rajasthan Highways Monetized : राष्ट्रीय राजमार्गों से राजस्व जुटाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने देशभर के 17 राजमार्ग खंडों को मॉनेटाइजेशन (मुद्रीकरण) के लिए चिन्हित किया है। इनमें राजस्थान के दो राजमार्ग खंड भी शामिल है। चयनित खंडों में प्रदेश से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर कोटा देवली के बीच 82.8 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर कोटा-बारां के बीच 104.1 किलोमीटर लंबा मार्ग शामिल है। इन मार्गो पर सीमलिया, फतेहपुर और किशोरपुरा टोल प्लाजा संचालित है।
एनएचएआइ के अनुसार, देशभर में चयनित 17 राजमार्ग खंडों की कुल लंबाई 1692.5 किलोमीटर है। यह पहल केंद्र सरकार की संपत्ति मुद्रीकरण नीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संचालित राजमार्ग संपत्तियों से पूंजी जुटाकर नए बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को गति देना और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है।
डीपीआर के बाद होगा मॉडल तय
योजना को आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद तय होगा कि संबंधित राजमार्ग खंड का मुद्रीकरण टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल से किया जाए या इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) के माध्यम से।
आम लोग भी कर सकेंगे निवेश
इनविट मॉडल के लिए आइपीओ लाया जा सकता है। इसकी यूनिट्स शेयर बाजार में खरीदी और बेची जा सकेंगी। यह व्यवस्था म्यूचुअल फंड की तरह होती है, जिसमें निवेशकों से जुटाई गई राशि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगाई जाती है।
एक अन्य खबर के अनुसार जयपुर और दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस व्यस्ततम हाईवे को अब ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग’ (एमएलएफएफ) सिस्टम से लैस करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वाहन बिना रुके ही टोल का भुगतान कर सकेंगे।
नई तकनीक से लैस यह सिस्टम न सिर्फ यात्रा को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि जाम, ईंधन खर्च और प्रदूषण को भी कम करने में बड़ा रोल निभाएगा। इस परियोजना के तहत प्रमुख टोल प्लाजा दौलतपुरा, शाहजहांपुर व मनोहरपुर पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। एक टोल प्लाजा पर करीब 300 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसके अलावा गुजरात और हरियाणा के कुछ टोल भी इस योजना में शामिल हैं।