
जयपुर। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब राजस्थान ने भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। सभी धर्म के नागरिकों को इसके दायरे में लाया जाएगा, वहीं लिव इन रिलेशनशिप के लिए पंजीयन अनिवार्य होगा। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आदिवासियों की परंपराओं व संस्कृति को संरक्षित रखते हुए प्रावधान किए जाएंगे।
विधि मंत्री जोगाराम पटेल व गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सोमवार को सचिवालय में मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून आवश्यक है और संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निर्देशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू की जाएगी।
वर्तमान प्रचलित पर्सनल लॉ, जैसे हिंदू कोड और मुस्लिम पर्सनल लॉ की अलग-अलग व्यवस्थाओं के स्थान पर समान नागरिक कानून लागू होगा। इसके जरिए महिलाओं को समान अधिकार प्रदान कर लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाएगा। इस कानून में बहुविवाह पर रोक, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा संपत्ति में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।
पटेल ने बताया कि राज्य सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड़ से संबंधित विभिन्न राज्यों के कानूनों के अध्ययन और सुझावों के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है, जिसमें पूर्व आइएएस शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान हाईकोर्ट में अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, श्रीगंगानगर राजकीय कॉलेज के पूर्व प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल, डॉ. शुचि चौहान व गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सदस्य बनाया गया है।
मई 2026 में गठित इस कमेटी से विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर जल्द ही अपनी अनुशंसा देने को कहा गया है। पटेल ने कहा कि यूसीसी के लिए आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाकर इसी साल कानून लाने का प्रयास किया जाएगा। अब तक उत्तराखंड व गुजरात में कानून बन चुका, जबकि असम का कानून राष्ट्रपति के पास विचाराधीन है, जबकि गोवा में लंबे समय से समान नागरिक संहिता जैसी व्यवस्था लागू है।