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क्या है राजस्थान का ‘देवास-3’ और ‘देवास-4’ प्रोजेक्ट? जिसका ‘उड़नखटोले’ में बैठ सीएम भजनलाल शर्मा ने लिया जायज़ा, देखें तस्वीरें

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'उड़नखटोले' से उदयपुर की महत्वाकांक्षी देवास-3 और देवास-4 पेयजल परियोजना का हवाई निरीक्षण किया। जानें क्या है यह 1,691 करोड़ का मेगा वाटर प्रोजेक्ट।

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CM Bhajan Lal Sharma Aerial Inspection Dewas 3 4 Project Udaipur Details

CM Bhajan Lal Sharma Aerial Inspection Dewas 3 and 4 Project

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मेवाड़ अंचल के सबसे महत्वाकांक्षी वाटर प्रोजेक्ट का हवाई सर्वे किया। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उदयपुर संभाग के गोगुंदा तहसील क्षेत्र के ऊपर पहुंचे, जहां उन्होंने अरावली की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच बन रहे विशालकाय बांधों और टनल निर्माण के कार्यों को देखा। हवाई निरीक्षण के ठीक बाद मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के मुख्य तकनीकी अभियंताओं के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि इस 1,691 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट को तय समय-सीमा के भीतर, बिना किसी तकनीकी लापरवाही के, उच्च गुणवत्ता और पूर्ण सुरक्षा मानकों के साथ पूरा किया जाए। बता दें कि ये प्रोजेक्ट झीलों की नगरी उदयपुर और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की वर्तमान और भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

गुणवत्ता और पुनर्वास कार्यों में नहीं हो कोताही : सीएम भजनलाल

हवाई सर्वे के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी हेलीकॉप्टर में मौजूद रहे, जिन्होंने टनल के अलग-अलग एडिट पॉइंट्स की प्रगति रिपोर्ट पेश की। टनल-3 के जिन 3 मुख्य एडिट्स का मुख्यमंत्री ने बारिकी से निरीक्षण किया, वे 3.15 किलोमीटर, 5.325 किलोमीटर और 9.10 किलोमीटर की लंबाई पर स्थित हैं, जहां टनल बोरिंग और ब्लास्टिंग का काम तेजी से चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि इस परियोजना का शिलान्यास भी हमारी सरकार के समय 1 मार्च 2024 को हुआ था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, जिस कार्य का शिलान्यास हम करते हैं, उसका उद्घाटन भी हमें ही समय पर करना है। उन्होंने बांध निर्माण के कारण प्रभावित होने वाले स्थानीय परिवारों के उचित मुआवजे और पुनर्वास संबंधी कार्यों को भी पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत निपटाने के निर्देश दिए।

आखिर क्या है देवास-3 और देवास-4 पेयजल परियोजना?

उदयपुर शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली ऐतिहासिक पिछोला और फतेहसागर झीलों में गर्मियों के दिनों में अक्सर पानी का स्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे पूरे संभाग में पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाती है। इस संकट के स्थाई और तकनीकी समाधान के लिए साबरमती बेसिन की वाकल नदी के पानी को मोड़कर उदयपुर लाने की यह पूरी बड़ी योजना तैयार की गई है, जिसे 'देवास परियोजना' का नाम दिया गया है।

इस मेगा प्रोजेक्ट के तीसरे और चौथे चरण की ख़ास बातें:

देवास तृतीय : यह बांध उदयपुर जिले की गोगुंदा तहसील के नाल (नाथिया थल) गांव के पास वाकल नदी पर बनाया जा रहा है। इसका कैचमेंट एरिया 86 वर्ग किलोमीटर है और इसकी कुल जल भराव क्षमता 500 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) तय की गई है। इस पानी को आगे भेजने के लिए 10.38 किलोमीटर लंबी एक जटिल टनल (सुरंग) का निर्माण किया जा रहा है।

देवास चतुर्थ : यह बांध भी गोगुंदा तहसील के ही अंबावा (झांक) गांव के पास बन रहा है। इसका कैचमेंट एरिया 90 वर्ग किलोमीटर है और इसकी क्षमता भी 500 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) है। यहां से पानी को देवास-3 के बांध तक पहुंचाने के लिए 3.88 किलोमीटर लंबी लिंक टनल बनाई जा रही है।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

जल संसाधन विभाग के मुख्य इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को नक्शे के माध्यम से समझाया कि यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह से ग्रेविटी और आधुनिक टनल इंजीनियरिंग के सिद्धांत पर काम करेगा। इस सिस्टम के तहत पानी का डायवर्जन कुछ इस प्रकार होगा:

  1. सबसे पहले देवास-4 बांध में एकत्रित होने वाले पानी को 3.88 किलोमीटर लंबी टनल के माध्यम से देवास-3 के मुख्य बांध में डायवर्ट किया जाएगा।
  2. इसके बाद देवास-3 बांध का कुल पानी 10.38 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग के जरिए पूर्व में निर्मित देवास-2 के आकोदड़ा बांध तक पहुंचेगा।
  3. आकोदड़ा बांध से यह विशाल जलराशि बूझड़ा और अमरजोक नदी से होती हुई सीधे उदयपुर की विश्व प्रसिद्ध पिछोला झील में गिराई जाएगी।

इस आपस में जुड़े हुए टनल और बांधों के नेटवर्क के माध्यम से प्रतिवर्ष कुल 1,000 मिलियन घन फीट (MCFT) अतिरिक्त पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट किया जा सकेगा। इससे उदयपुर शहर को दैनिक रूप से 3.43 करोड़ लीटर अतिरिक्त शुद्ध पेयजल मिलना सुनिश्चित हो जाएगा।

किन जिलों मिलेगा इस 'मेगा वाटर प्रोजेक्ट' का लाभ?

इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरी तरह धरातल पर उतरने के बाद मुख्य रूप से उदयपुर जिला सबसे बड़ा लाभार्थी बनेगा। उदयपुर शहर की शहरी आबादी के साथ-साथ इसके आस-पास के सभी नगरीय क्लस्टर्स की पेयजल समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, इस परियोजना के डाउनस्ट्रीम में आने वाले उदयपुर जिले के गोगुंदा और कोटड़ा उपखंड के कुल 186 ग्रामीण आदिवासी गांवों को पीने के साफ पानी की लाइनों से जोड़ा जाएगा।

झीलों में साल भर पानी रहने से भूजल स्तरमें सुधार होगा, जिसका सीधा फायदा उदयपुर के पड़ोसी जिलों जैसे राजसमंद और चित्तौड़गढ़ के सीमावर्ती इलाकों के जल स्रोतों को भी अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि साल भर झीलों के लबालब रहने से उदयपुर का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे पूरे मेवाड़ संभाग को बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा।

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