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राजस्थान में अनुकंपा नियुक्ति के नियम बदले: अब बहू और शादीशुदा बेटी को भी मिलेगी सरकारी नौकरी, जानें शर्तें

राजस्थान सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति नियम 1996 में बड़ा बदलाव किया है। अब मृतक सरकारी कर्मचारी के अन्य पात्र आश्रित न होने पर बहू और विवाहित बेटी को भी नियुक्ति मिल सकेगी। अविवाहित कर्मचारी की मौत पर पूरी तरह आश्रित माता-पिता, भाई या बहन पात्र होंगे।
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rajasthan change compassionate job rule

Rajasthan Change Compassionate Job Rule (Photo-AI)

Compassionate Appointment Rules Rajasthan: उदयपुर: सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक सहारा देने वाली अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था में राजस्थान सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। संशोधन के बाद निर्धारित परिस्थितियों में बहू और विवाहित बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र आश्रितों में शामिल किया गया है। साथ ही, अविवाहित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके माता-पिता, अविवाहित भाई या बहन को भी पात्रता के दायरे में रखा गया है। कार्मिक विभाग ने 18 अगस्त को राजस्थान मृतक सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

पहले क्या था, अब क्या बदला

पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रितों की श्रेणी मुख्य रूप से जीवनसाथी, पुत्र और निर्धारित श्रेणी की बेटियों तक सीमित थी। अब नियमों में पारिवारिक परिस्थितियों के अनुसार दायरा बढ़ाया गया है। विधिवत गोद लिए गए पुत्र तथा अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा गोद ली गई बेटी की स्थिति भी स्पष्ट की गई है। सबसे बड़ा बदलाव बहू और विवाहित बेटी को लेकर है। यदि नियमों में पहले निर्धारित कोई अन्य पात्र आश्रित उपलब्ध नहीं है तो इन दोनों पर भी नियुक्ति के लिए विचार किया जा सकेगा।

रिश्ते के साथ आर्थिक निर्भरता भी जरूरी

नए नियमों में पात्रता का आधार केवल पारिवारिक रिश्ता नहीं होगा। संबंधित व्यक्ति का मृतक कर्मचारी पर उसकी मृत्यु के समय पूरी तरह आर्थिक रूप से आश्रित होना जरूरी है। इसलिए बहू, विवाहित बेटी, माता-पिता या भाई-बहन होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलेगा।

अविवाहित कर्मचारी के मामले में माता-पिता, अविवाहित भाई या बहन तभी पात्र होंगे, जब वे कर्मचारी पर पूरी तरह निर्भर रहे हों। इस प्रावधान से उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके सामने कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

गोद लिए बच्चों की पात्रता भी स्पष्ट

संशोधित नियमों में कर्मचारी की ओर से जीवनकाल में विधिवत गोद लिए गए बच्चों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया है। गोद लिया पुत्र पुत्र की श्रेणी में और विधिवत गोद ली गई अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटी संबंधित श्रेणी में मानी जाएगी।