
शिक्षक-अफसरों की कमी पूरी कर रहे उच्च शिक्षित पियोन। फोटो: एआई
उदयपुर। राजस्थान में 34 साल की सबसे बड़ी 54 हजार से ज्यादा पदों पर चतुर्थ श्रेणी भर्ती ने अनोखा इतिहास रचा है। भर्ती 10वीं पास योग्यता के आधार पर पियोन, चपरासी जैसे पदों के लिए थी, जिसमें 24 लाख से ज्यादा ने भाग लिया। चयनित 90 फीसदी से ज्यादा युवाओं की प्रोफाइल कॉलेज या प्रशासनिक दफ्तर के उच्च अधिकारियों जैसी है। शैक्षणिक योग्यता उच्च शिक्षित ग्रेजुएट की है। पोस्टिंग के बाद सरकारी संस्थानों में अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है।
प्रिंसिपल और अधिकारी सम्मान दे रहे हैं। उन्हें काबिलियत के आधार पर बच्चों को स्कूल में पढ़ाने और कम्प्यूटर ऑपरेट करने जैसे काम करवा रहे हैं। राजस्थान के सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में नियुक्ति होने के बाद ये युवा वहां शिक्षकों, एलडीसी की कमी पूरी कर रहे हैं। आरपीएससी ग्रेड- 1 और 2 में कुछ नंबरों से रह जाने वाले एमएससी- बीएड युवा इन दफ्तरों में काम से समय निकालकर स्कूल में कक्षाएं ले रहे हैं। एलडीसी और यूडीसी न होने के कारण कम्प्यूटर का काम कर रहे हैं।
नियुक्ति हनुमानगढ़ के एक स्कूल में हुई। बीएड और एमएससी हैं। शिक्षक वर्ग- 2 का परिणाम लंबित है। जिस स्कूल में नियुक्ति हुई है, वहां शिक्षकों की कमी है। प्रधानाचार्य ने इनके शैक्षणिक योग्यता को ध्यान में रख बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी है। पराग का कहना है कि सारा काम करते हुए दिन भर में 12वीं क्लास की गणित और फिजिक्स की क्लासेस ले रहा हूं। प्रिंसिपल का पूरा सहयोग है।
सुभाष मास्टर्स कर चुके हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दो किताबें पब्लिश हो चुकी। अभी तक 3 परीक्षा दे चुके। एक का रिजल्ट आना बाकी है, एक परीक्षा रद्द हो चुकी है और तीसरी ग्रेड- 4 में चयन हो चुका। वे यूडीसी और ग्रेड- 1 की तैयारी जारी रखे हुए हैं। दफ्तर में एलडीसी का पद खाली है तो वहां फाइल वर्क और कंप्यूटर ऑपरेट कर रहे हैं।
लोकेश ने जयपुर की नामी कॉलेज से इंजीनियरिंग की। दो साल से आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। आरएएस मेंस में 1 नंबर से रह गए। स्टेनोग्राफर ग्रेड- 2 का रिजल्ट लंबे समय से अटका था, चपरासी भर्ती में चयन हो गया। इस बीच मेरा स्टेनोग्राफर परीक्षा का रिजल्ट आ गया। नौकरी की सिक्योरिटी के लिए ग्रेड- 4 जाॅइन करने वाला था, लेकिन अब इससे बेहतर पद पर चयन हो गया।
इनमें से कई एमएससी और बीएड कर व्याख्याता बनने की तैयारी में थे। किसी ने सब-इंस्पेक्टर, पटवारी, वीडियो या ईओ/आरओ जैसी परीक्षाओं में मुख्य चरण और साक्षात्कार तक का सफर तय किया, पर कुछ मामूली नंबरों से सफल नहीं हो पाए। रोजगार की अनिश्चितता और भर्ती परीक्षाओं के लंबे खिंचने के कारण इन युवाओं ने इस पद को स्वीकार किया।
Updated on:
19 Aug 2026 08:27 am
Published on:
19 Aug 2026 08:27 am
