
जयपुर . राजस्थान विश्वविद्यालय में एमएससी गणित के पहले सेमेस्टर में नियमों को ताक पर रखकर रसूखदार छात्र को दाखिला देने का कारनामा सामने आया है। इसमें सीटें सिर्फ 100 हैं जबकि पीजी प्रवेश की मेरिट लिस्ट में 2043 वें नम्बर पर रहे छात्र को प्रवेश दे दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से जारी दोनों प्रवेश सूचियों में उसका नाम तक नहीं था। ऐसे में यूआरएटीपीजी-2017 के तहत हुए सभी प्रवेशों पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।
यह है नियम
राजस्थान विवि में स्नतकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान एडमिशन टेस्ट फॉर पोस्ट ग्रेजुएशन (यूआरएटीपीजी) के तहत होता है। इसमें एंट्रेंस टेस्ट होता है, जिसके प्राप्तांक में ग्रेजुएशन के प्रतिशत का 30 फीसदी वेटेज जोड़कर मेरिट लिस्ट जारी की जाती है। इसके आधार पर ही विद्यार्थी को प्रवेश दिया जाता है।
यह है मामला
एमएससी गणित के पहले सेमेस्टर में करीब 2940 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा दी थी। इसमें योगेश पुत्र रामकुमार सिंह नामक छात्र का प्रवेश हुआ, जो मेरिट लिस्ट में 2043 वें नंबर पर है। जबकि एंट्रेंस टेस्ट में योगेश के 70 में से 30 ही अंक आए थे।
इसलिए नहीं हो सकता प्रवेश
योगेश के यूआरएटीपीजी के तहत हुए एंट्रेंस टेस्ट में 30 अंक आए थे। ग्रेजुएशन में पूरे 100 फीसदी अंक मानें तो 30 फीसदी वेटेज 30 अंक होगा। अंक और वेटेज मिला दें तो यह 60 फीसदी होगा। सूत्रों का कहना है कि एंट्रेंस के अंक और ग्रेजुएशन के प्रतिशत का वेटेज मिलाकर करीब 49 प्रतिशत अंक ही बन रहे हैं। जबकि छात्र ओबीसी कैटेगरी का है, जिसकी कट ऑफ 75.57 प्रतिशत रही है।
सही कैसे, विवि प्रशासन को पता नहीं
सूत्रों की मानें तो छात्र योगेश यूनिवर्सिटी की सिंडीकेट के किसी सदस्य से ताल्लुक रखता है। इसीलिए उसे गुपचुप दाखिला दिया गया। हालांकि कुलपति प्रो. आरके कोठारी और विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने प्रवेश को नियमानुसार बताया लेकिन उस नियम की जानकारी नहीं दे पाए, जिसके तहत यह प्रवेश हुआ है।