
-सक्षम अग्रवाल
Food Waste in Rajasthan: भारत अन्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है, लेकिन आज भी बड़ी आबादी भरपेट भोजन से वंचित है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 14.25 करोड़ लोग अल्पपोषण के शिकार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल घरों में करीब 7.82 करोड़ टन खाना बर्बाद होता है। यानी देश में हर व्यक्ति सालभर में करीब 55 किलो खाना फेंक देता है।
राजस्थान में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। यहां हर दिन करीब 9490 मीट्रिक टन भोजन बर्बाद हो रहा है। सबसे ज्यादा बर्बादी शादी, पार्टी और बड़े आयोजनों में होती है। यह बर्बादी सिर्फ विवेकपूर्ण इस्तेमाल और बेहतर प्लानिंग से रोकी जा सकती है। साथ ही, बर्बाद होने वाली खाद्य सामग्री से लाखों-करोड़ों लोगों की भूख मिटाई जा सकती है।
भोजन की बर्बादी सिर्फ घरों में नहीं होती। खेत से बाजार और बाजार से घर तक पहुंचने के दौरान भी बड़ी मात्रा में अनाज, फल, सब्जियां और दूसरी खाद्य सामग्री खराब हो जाती है। यूएनईपी फूड वेस्ट इंडेक्स और डब्ल्यूआरआई इंडिया रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भंडारण, ढुलाई और दूसरी प्रक्रियाओं में करीब 6.89 करोड़ टन खाद्य सामग्री का नुकसान होता है। इसकी कीमत करीब 1.53 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। वर्ष 2025 में देश में कुल 7.75 करोड़ टन खाद्य सामग्री बर्बाद हुई। यह प्रति व्यक्ति करीब 55 किलोग्राम खाद्य सामग्री के बराबर है।
रिफूड इंडिया और अन्नक्षेत्र ट्रस्ट: जयपुर-जोधपुर जैसे बड़े शहरों में ये संस्थाएं समारोहों के बाद बचा हुआ खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाती हैं।
रोटी बैंक मूवमेंट: कोटा, अजमेर और उदयपुर में स्थानीय युवाओं की टोलियां घरों और आयोजनों से भोजन एकत्र कर जरूरतमंदों को वितरित करती हैं।
सामुदायिक जागरूकता अभियान: इन अभियानों के तहत विवाह स्थलों पर बोर्ड लगवाए जाते हैं 'प्लेट में उतना ही लें, जितना खा सकें।'
| क्रम | शहर | भोजन की बर्बादी |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 110 टन |
| 2 | जोधपुर | 75 टन |
| 3 | कोटा | 60 टन |
| 4 | उदयपुर | 50 टन |
| 5 | अजमेर | 45 टन |
| 6 | अलवर | 35 टन |
| 7 | भीलवाड़ा | 30 टन |
| 8 | सीकर | 25 टन |
| 9 | भरतपुर | 20 टन |