जयपुर

Rajasthan: चित्रकार जतिन दास बोले- कलाकार बनने के लिए चाहिए 2-3 जीवन, आज के युवा बस फेमस होना चाहते हैं

Who is Jatin Das: राजस्थान पत्रिका ने चित्रकार और पद्म भूषण जतिन दास से खास बातचीत की। बातचीत के दौरान जतिन दास ने कहा, आज के युवा आर्टिस्ट कुछ भी सीखना नहीं चाहते, वे बस फेमस होना चाहते हैं।

3 min read
Jul 02, 2025
जतिन दास ने बताए अपने अनुभव (फोटो- पत्रिका)

…रवि शंकर शर्मा
Who is Jatin Das: जयपुर:
वर्तमान समय में ऐसे कई युवा कलाकार हैं, जो वरिष्ठ कलाकारों को अपना आइडल मानते हैं। वहीं, हमारा आइडल तो पहाड़, जानवर और पेड़ हैं। दुनिया भर सहित हिंदुस्तान में बहुत अच्छे कलाकार हुए हैं, जिनका नाम लोग भूल गए हैं। अब सारी दुनिया आर्टिफिशियल और कमर्शियल हो गई है। यह कहना है, 84 वर्षीय चित्रकार और पद्म भूषण जतिन दास का। वर्तमान में वे ओडिशा स्थित जेडी सेंटर ऑफ आर्ट के संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं।


पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि पहले जब कोई कलाकार देश के लिए काम करते थे तो वे पैसे नहीं लेते थे। कलाकारों के पास पैसे नहीं होते थे तो वे कागज और दीवारों पर तस्वीरें बना देते थे। अब समय के अनुसार ये परिदृश्य बदल गया है।


'पेंटर हूं और आर्टिस्ट बनना चाहता हूं'


जतिन दास ने कहा कि भारत की संस्कृति बहुत पुरानी है। यहां का म्यूजिक, चित्र और नृत्य हाई क्वालिटी के हैं। जब मैं 50-60 वर्ष की उम्र का था, तब कहता था कि मैं पेंटर हूं और आर्टिस्ट बनना चाहता हूं। अब आज किसी युवा को पूछते हैं तो वह ऊंची आवाज में कहता है कि मैं कलाकार हूं।


उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि कलाकार बनने के लिए दो-तीन जीवन चाहिए। यदि कोई एक जीवन में ही कलाकार बन जाए तो बेहतर है, लेकिन उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं और बहुत काम करना पड़ता है। आज के आर्टिस्ट कुछ सीखना नहीं चाहते। वे बस फेमस होना चाहते हैं। सब कुछ कॉमर्शियल हो गया है।


ड्रॉइंग के दौरान रबर का उपयोग नहीं


उन्होंने कहा कि कॅरियर के दौरान ब्रॉन्ज और मिट्टी में भी स्कल्पचर बनाए। जब मैं ड्रॉइंग करता हूं तो रबर का उपयोग नहीं करता हूं। लाइन गलत हो जाने पर ड्रॉइंग को ही फाड़ देता हूं। मेरे सिद्धांत बहुत अलग है, जिस देश में बहुत किस्म की कला है। उसमें कलाकार बनने के लिए बहुत कष्ट उठाना पड़ेगा। सब चीजों को ढंग से सीखने पर फोकस होना चाहिए और सीखने के लिए 30 से 40 वर्ष चाहिए।


राजस्थान बहुत खूबसूरत


राजस्थान मुझे बहुत पसंद है। कई वर्षों बाद यहां आया हूं। पहले आर्टिस्ट कैंप एक महीने का होता था, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। राजस्थान में खूबसूरत हवेली और महल हैं। पहले मिट्टी में पेड़ लगाते थे, लेकिन ब्रिटिश आने के बाद लोग गमले में पौधे लगाने लग गए।


दुनिया भर में किए 71 सोलो शो, संसद में लगी हुई 7 बाय 68 फीट पेंटिंग


चित्रकार, कवि और मूर्तिकार जतिन दास पिछले छह दशक से रचनात्मकता दिखा रहे हैं। उनके काम ने समकालीन भारतीय कला की भाषा को फिर से परिभाषित किया है। उन्होंने अब तक वेनिस से लेकर टोक्यो तक दुनियाभर में 71 सोलो शो आयोजित किए हैं।


उनके काम मुख्य रूप से ऑयल, वॉटर कलर, स्याही और कॉन्टे में हैं। उन्होंने कई मूर्तियां, ग्राफिक्स, भित्ति चित्र और इंस्टॉलेशन किए हैं। दास की एक बड़ी पेंटिंग ‘द जर्नी ऑफ इंडिया: मोहनजोदारो टू महात्मा गांधी’ (7 बाय 68 फीट) नई दिल्ली में भारतीय संसद में लगी हुई है।


'कभी नहीं करता कलर वेस्ट'


दास ने कहा कि एक्रेलिक एक घटिया मीडियम है। लोग इसमें पेंटिंग करते हैं। यह जल्दी सूख जाती है और वे उसे बेच देते हैं। इसमें मीडियम की गलती नहीं है। काम करने के दौरान मैं कभी भी कलर वेस्ट नहीं करता हूं। चाहे रात के 2-3 बजे हों, ब्रश को धोकर ढंग से रखता हूं। ये हमारा धर्म है।

Updated on:
02 Jul 2025 12:53 pm
Published on:
02 Jul 2025 12:37 pm
Also Read
View All

अगली खबर