
जयपुर. युवाओं का मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के जरिए कारोबार खड़ा करने का सपना या तो बैंकों-वित्तीय संस्थानों की फाइलों में कैद है या फिर सरकारी फाइलों में ही उलझकर दम तोड़ गया। युवाओं ने आवेदन में तो सरकार के लक्ष्यों को पार कर लिया, लेकिन प्रक्रिया में सरकारी या बैंकों की खानापूर्ति में हार गए। इसके चलते करीब सवा लाख आवेदनों में से 50 हजार से भी कम आवेदन बैंकों तक पहुंचे। बैंकों ने तो दो हजार युवाओं को ही ऋण उपलब्ध कराया है। इस योजना में प्रदेशभर में सवा लाख से अधिक आवेदन आए, जिनमें कुल 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऋण चाहा गया। इनमें से जांच में 46 हजार से अधिक युवाओं के आवेदन खरे पाए गए, इन आवेदनों को उद्योग विभाग ने मंजूर कर बैंकों या वित्तीय संस्थानों को भेज दिया। इनमें से बैंकों-वित्तीय संस्थानों ने ढाई हजार से अधिक आवेदनों को मंजूर भी कर लिया, लेकिन ऋण अब तक करीब दो हजार को ही मिल पाया है।
शुरुआत में 31 हजार युवाओं को स्वरोजगार देने का लक्ष्य रखा गया, जिसे दो गुना तक कर दिया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट भाषण में इस योजना के जरिए एक लाख युवाओं का साथ देने का भरोसा दिलाया गया। उधर, हकीकत यह है कि लक्ष्य की करीब 6.5 फीसदी ही प्राप्ति हो सकी है। प्रदेश के 32 जिलों में तो स्थिति यह है कि लक्ष्य के 10 फीसदी से भी कम युवाओं को ही इस योजना का साथ मिला है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कमियों की पूर्ति नहीं होने से बड़ी संख्या में आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे हैं। और जो स्वीकार हो रहे हैं, उनमें भी अधिकांश में युवा मशीनरी या कार्य के लिए बैंकों से सीधे भुगतान के बजाय हाथ में नकद राशि चाह रहे हैं।