राम जल सेतु लिंक परियोजना के डीपीआर में वर्तमान लागत 89,000 करोड़ रुपए बताई गई है। वर्ष 2015 में इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए थी, लेकिन कार्य क्षेत्र और दायरे में बड़ा विस्तार हुआ है।
जयपुर। प्रदेश की सबसे बड़ी बहुप्रतीक्षित राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित ईआरसीपी) की डीपीआर अंतिम रूप ले चुकी है। अब इस परियोजना को लेकर निगाहें आगामी केंद्रीय कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इसकी फंडिंग को लेकर निर्णय होने की संभावना है।
राज्य सरकार ने परियोजना की कुल लागत का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहयोग मांगा है। इसे राष्ट्रीय स्तर की रिवर लिंकिंग योजना के तहत शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। देश में अब तक रिवर लिंकिंग योजना के अंतर्गत केवल केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को ही स्वीकृति और फंडिंग मिली है।
सूत्रों के मुताबिक राजस्थान और मध्य प्रदेश का डीपीआर तक काम हो चुका है। अब केन्द्रीय शक्ति मंत्रालय स्तर पर इसे कैबिनेट बैठक के लिए भेजना प्रस्तावित किया जाएगा। प्रोजेक्ट में चंबल और इसकी सहायक नदियां पार्वती, कालीसिंध, कुनो, बनास, बाणगंगा, रूपरेल, गंभीरी और मेज जैसी नदियों को जोड़ा जा रहा है। इससे प्रदेश में पेयजल उपलब्धता, सिंचाई क्षमता बढ़ने और भूजल स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।
डीपीआर में परियोजना की वर्तमान लागत 89,000 करोड़ रुपए बताई गई है। वर्ष 2015 में इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए थी, लेकिन कार्य क्षेत्र और दायरे में विस्तार, तकनीकी बदलाव और निर्माण लागत बढ़ने के कारण इसमें 52,000 करोड़ रुपए की वृद्धि हो गई। योजना के प्रारंभिक खाके की तुलना में अब इसमें अधिक जिलों को जोड़ने, अतिरिक्त नहर नेटवर्क, पंपिंग स्टेशनों और जलाशयों के निर्माण को शामिल किया गया है। इसी कारण लागत में बड़ा इजाफा हुआ है।
रामगढ़ बैराज, महलपुर बैराज, नवनेरा पंप हाउस, चम्बल नदी पर एक्वाडक्ट, और मेज एनीकट सहित करीब 9600 करोड़ रुपए के कार्य अंतिम चरण में है। ईसरदा बांध के पहले फेज का काम भी हो चुका है।
अब करीब 14600 करोड़ के काम शुरू होंगे। इसमें एक बांध को दूसरे बांध से जोड़ने के लिए नहर निर्माण, पाइपलाइन डाली जाएगी। वहीं दो जगह कृत्रिम जलाशय बनाएंगे। इसको मुख्य रूप से चार अलग-अलग तरह से बांटा गया है, ताकि काम जल्द हो सके।
परियोजना से राजस्थान के 17 जिलों को पानी मिलेगा। इसमें जयपुर के अलावा झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर और टोंक जिला शामिल हैं। राजस्थान को इस प्रोजेक्ट से 4103 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिलेगा।