
Pankaj Ojha Social Media Post: राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इस समय आरएएस अधिकारी पंकज ओझा की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर तैनात पंकज ओझा ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा की है, जिसे लेकर ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। जयपुर के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शिकायत भेजकर सिविल सेवा नियमों का हवाला देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ओझा ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का खुलकर समर्थन किया। अपनी बेटी की तस्वीर के साथ लिखी इस भावुक पोस्ट में उन्होंने न केवल पेपर लीक माफिया के खिलाफ 7 दिनों के भीतर फांसी की सजा देने का कानून बनाने की वकालत की है, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों को लेकर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा तंज कसा।
आरएएस पंकज ओझा ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर अपनी बेटी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए बेहद भावुक अंदाज में अपनी बात रखी। पंकज ओझा ने लिखा कि देश की जनता को और मीडिया को बच्चों के विरोध प्रदर्शन को बदनाम नहीं करना चाहिए। ये छात्र हमारे देश का भविष्य हैं, जो बेहद सीधे और भोले हैं और जिन्हें अपनी मांग सही तरीके से रखना भी नहीं आता।
इस्तीफे पर तंज: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा कि छात्र भले ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खुश होना चाहते हों, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि एक मंत्री के इस्तीफे से व्यवस्था नहीं बदलेगी। कोई दूसरा मंत्री आ जाएगा, लेकिन सिस्टम जस का तस रहेगा और फिर से वही स्थितियां पैदा होंगी।
खुद का साझा किया दर्द: उन्होंने अपने छात्र जीवन के संघर्ष को याद करते हुए लिखा कि सालों पहले जब वे खुद आरएएस (RAS) परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब भी इसी प्रकार से पेपर लीक हुआ करते थे और अभ्यर्थियों को दर्द सहना पड़ता था। इस पोस्ट पर विवाद बढ़ने पर पंकज ओझा ने इस पोस्ट को अपने फेसबुक हैंडल से हटा दिया है, लेकिन पोस्ट के स्क्रीनशोट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
सिस्टम की खामियों को उजागर करते हुए आरएएस अधिकारी ने पेपर लीक के खिलाफ बेहद कड़ा और कड़ा कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को पेपर लीक रोकने के लिए एक ऐसा सख्त कानून बनाना चाहिए, जिसके तहत धांधली करने वाले आरोपियों को महज 7 दिनों के भीतर फांसी की सजा दी जा सके।
डिस्क्लेमर से बचाव की कोशिश: सिविल सेवा आचरण नियमों (Conduct Rules) को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पोस्ट के अंत में एक डिस्क्लेमर भी जोड़ा। उन्होंने लिखा कि इस पोस्ट का किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह केवल उनकी छोटी बेटी की चिंताओं और भावनाओं से जुड़ा हुआ है जो देश के मौजूदा माहौल से आहत है।
एक जिम्मेदार सरकारी सेवक होने के नाते किसी सरकारी नीति या केंद्रीय मंत्रियों के फैसलों के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणी करना राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि एक सेवारत अधिकारी द्वारा ऐसा बयान देना सिविल सेवा नियमों के विपरीत है और यह राज्य व केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधने जैसा है।
पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद अब राजस्थान के कार्मिक विभाग की नजरें पंकज ओझा की इस गतिविधि पर टिकी हुई हैं। चर्चा है कि क्या इस मामले में उनके खिलाफ कोई औपचारिक कारण बताओ नोटिस या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान की नौकरशाही में पंकज ओझा को बेबाक अधिकारी माना जाता है। उनका नाम पहले भी कई चर्चित मामलों में सामने आ चुका है और वे कई बार विवादों में भी रहे हैं।