जयपुर

राजस्थान पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में बागियों से BJP-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, टिकट कटने से नाराज नेता बिगाड़ेंगे समीकरण?

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के तीसरे चरण में टिकट बंटवारे के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के बागी नेताओं ने समीकरण बिगाड़ दिए हैं। नाम वापसी से पहले दोनों दलों के नेताओं ने बागी दावेदारों को मनाने के लिए मान-मनुहार की कवायद तेज कर दी है।
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Updated: 26 Oct 2026, 8:01 AM IST
rajasthan panchayat election 2026
राजस्थान पंचायत चुनाव में बागियों ने बढ़ाई बीजेपी-कांग्रेस की धड़कनें (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Panchayat Election 2026: जयपुर: पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में टिकट वितरण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के सामने बागियों को मनाने की चुनौती है। सोमवार को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से पहले रविवार देर रात तक दोनों दलों में मान-मनुहार का दौर चला। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं और पार्टी प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। दोनों दल स्थानीय स्तर पर बागियों को बैठाने में जुटे हैं, वहीं प्रदेश नेतृत्व भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। भाजपा बागियों के पीछे प्रभावशाली नेताओं की भूमिका तलाश रही है, जबकि कांग्रेस में जिलाध्यक्षों और स्थानीय नेताओं को मोर्चे पर लगाया गया है। दोनों ही दलों में बागियों को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वे किस नेता से जुड़े हुए हैं।

भाजपा: कुछ को मनाने में मिली सफलता

प्रदेश भाजपा ने तीसरे चरण में बागी होकर चुनाव मैदान में उतरे पार्टी नेताओं की जानकारी जिलाध्यक्षों से मांगी थी। जानकारी मिलने के बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही बागियों को मनाने की कवायद शुरू कर दी गई। कुछ बागियों को बैठाने में सफलता मिली है, लेकिन कई अब भी मैदान में डटे हैं। ऐसे प्रत्याशियों को मनाने के लिए पार्टी उनके संपर्कों का पता लगा रही है।

यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि बागी किस वरिष्ठ नेता के संपर्क में हैं और टिकट के लिए किस नेता ने उनकी सिफारिश या पैरवी की थी। यानी भाजपा की कोशिश सिर्फ बागियों को बैठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पीछे खड़े नेताओं की भूमिका समझने की भी है। हालांकि, भाजपा ने सभी मंत्री-विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को भी बागियों को साधने का लक्ष्य दिया है।

कांग्रेस: जिलाध्यक्षों को सौंपी जिम्मेदारी

कांग्रेस ने बागियों को लेकर प्रदेश स्तर पर अलग से जानकारी नहीं मांगी, लेकिन जिलाध्यक्षों और क्षेत्रीय वरिष्ठ नेताओं को नाराज दावेदारों को मनाकर नामांकन वापस कराने की जिम्मेदारी दी है। प्रदेश नेतृत्व भी इस पूरी कवायद पर नजर रख रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई जगह जिलाध्यक्षों ने स्थानीय नेताओं और विधायकों की मदद से बागियों को बैठाने में सफलता पाई है।

इसके बावजूद बड़ी संख्या में बागी चुनाव मैदान में हैं और पार्टी प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। प्रदेश संगठन के सूत्रों के अनुसार, ऐसी कोई जिला परिषद या पंचायत समिति नहीं है, जहां कांग्रेस को बागियों की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा हो। सोमवार को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक पार्टी की कोशिश नाराज दावेदारों को मनाने की है।

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26 Oct 2026, 8:01 AM IST
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