जयपुर

राजस्थान में RERC का अहम फैसला, बिजली चोरी के मामलों में फंसे उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

Rajasthan Electricity News: बिजली चोरी के विवाद में फंसे उपभोक्ताओं को राहत देते हुए राजस्थान इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन (आरईआरसी) ने अपील करने की समय सीमा 30 से बढ़ाकर 60 दिन कर दी है।

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Apr 29, 2026
राजस्थान में बिजली चोरी। पत्रिका फाइल फोटो

Rajasthan Electricity Theft Cases: उदयपुर। बिजली चोरी के विवाद में फंसे उपभोक्ताओं को राहत देते हुए राजस्थान इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन (आरईआरसी) ने अपील करने की समय सीमा 30 से बढ़ाकर 60 दिन कर दी है। साथ ही पहले तय अवधि में अपील नहीं कर पाने वाले उपभोक्ताओं को भी एक और मौका दिया गया है। यह प्रस्ताव राज्य के तीनों डिस्कॉम (जयपुर, अजमेर, जोधपुर) की ओर से दिया गया था, इसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि संशोधित व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाए।

आदेश के अनुसार अब कोई भी उपभोक्ता या गैर-उपभोक्ता, जिसके खिलाफ बिजली चोरी का केस दर्ज हुआ है, वह वीसीआर असेसमेंट रिव्यू कमेटी के समक्ष 60 दिनों के भीतर अपील कर सकेगा। पहले यह समय सीमा 30 दिन की थी। आयोग ने आदेश में माना कि कई मामलों में नोटिस समय पर नहीं मिल पाता, दस्तावेज जुटाने में देरी होती है या उचित कानूनी सलाह लेने में समय लगता है। ऐसे में 30 दिन की समय सीमा कई बार कम होती थी। इस बदलाव से उपभोक्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।

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फिर खुलेंगे पुराने केस

इसके अलावा, आयोग ने उन मामलों को भी राहत दी है, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनमें संबंधित पक्ष 30 दिन की अवधि में अपील नहीं कर पाए थे। ऐसे मामलों में अब आदेश जारी होने के 30 दिन के भीतर अपील का अंतिम अवसर मिलेगा।

क्या है वीसीआर कमेटी?

विजिलेंस केस रिपोर्ट असेसमेंट रिव्यू कमेटी बिजली चोरी से जुड़े मामलों की समीक्षा करती है। यह कमेटी डिस्कॉम स्तर पर गठित होती है, जहां उपभोक्ता जांच रिपोर्ट के खिलाफ अपील कर सकते हैं। कमेटी साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर निर्णय लेकर राहत या संशोधन कर सकती है।

किन्हें मिलेगा सीधा फायदा

नए नियम का सबसे बड़ा फायदा उन उपभोक्ताओं को होगा, जो नोटिस देरी से मिलने, जानकारी के अभाव या दस्तावेज जुटाने में देरी से समय पर अपील नहीं कर पाए। ग्रामीण, छोटे उपभोक्ता वर्ग को विशेष रूप से राहत मिलेगी, इनके लिए कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच आसान नहीं होती।

इनका कहना है

यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार समय सीमा बढ़ाने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक संतुलित होगी, हालांकि इससे मामलों के निस्तारण में थोड़ी देरी भी हो सकती है।
-वाईक बोलिया, रिटायर्ड एसई व ऊर्जा सलाहकार

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