जयपुर

Revenue Collection: डिस्कॉम ने बनाया सर्वाधिक राजस्व संग्रहण का रिकॉर्ड, 9,462 करोड़ रूपए से अधिक रही वसूली

Power Sector: वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम की कुल राजस्व वसूली 29,462 करोड़ रूपए से अधिक रही। कुल बिलिंग राशि 28,863 करोड़ रूपए से यह 599 करोड़ रूपए अधिक है।
3 min read
Apr 01, 2026
Feature image

Electricity Billing: जयपुर. राज्य सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। जयपुर विद्युत वितरण निगम ने इस बार राजस्व संग्रहण के मामले में अपने पूर्व के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम की कुल राजस्व वसूली 29,462 करोड़ रूपए से अधिक रही। कुल बिलिंग राशि 28,863 करोड़ रूपए से यह 599 करोड़ रूपए अधिक है। इसका तात्पर्य यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम ने जितनी बिजली उपभोक्ताओं को दी, उसकी शत-प्रतिशत राशि तो वसूल की ही, बकाया 599 करोड़ रूपए भी पुराने बकायादारां से वसूल कर लिए।

इस प्रकार जयपुर डिस्कॉम ने 102 प्रतिशत राजस्व अर्जित करने में सफलता प्राप्त की है। यह निगम के 26 वर्षों के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक राजस्व संग्रहण है। इससे पूर्व वित्तीय वर्ष 2017-18 में सर्वाधिक 101.02 प्रतिशत राजस्व अर्जित किया गया था।

भरतपुर जोन ने प्राप्त किया सर्वाधिक राजस्व

निगम के तीनों जोन में सर्वाधिक 104.63 प्रतिशत राजस्व भरतपुर जोन ने प्राप्त किया है। इसके बाद कोटा जोन ने 103.64 प्रतिशत तथा जयपुर जोन ने 101.32 प्रतिशत राजस्व अर्जित किया है।
भरतपुर जोन में सर्वाधिक वसूली होना अधिक उत्साहजनक इसलिए है क्योंकि, इस जोन के भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली आदि जिलों में राजस्व संग्रहण हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। यहां पीडीसी उपभोक्ताओं से बकाया वसूली तथा विद्युत चोरी के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई। लंबे समय से अटके पड़े बिजली चोरी के बकाया प्रकरणों का लोक अदालतों के माध्यम से सहमति के जरिए निस्तारण कराया गया। बकाया बिल जमा नहीं कराने वाले पीडीसी उपभोक्ता किसी अन्य परिजन के नाम से कनेक्शन नहीं ले पाएं। यह व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नतीजा यह हुआ कि पीडीसी उपभोक्ताओं ने बकाया चुकाना मुनासिब समझा। बेहतर विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ शत-प्रतिशत बिलिंग एवं शत-प्रतिशत वसूली को प्राथमिकता दी गई। इसी का परिणाम रहा कि राजस्व वसूली के लिहाज से ऐसे कठिन जिलों में इस बार लगभग 4 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रहण हुआ।

108 प्रतिशत से अधिक संग्रहण के साथ करौली सर्किल टॉप पर

निगम के सभी 18 सर्किलों ने इस बार शत-प्रतिशत राजस्व अर्जित किया है। इनमें करौली ने सर्वाधिक 108.80 प्रतिशत, बूंदी ने 105.66 प्रतिशत, कोटा़ ने 104.08 प्रतिशत, भरतपुर सर्किल ने 103.75 प्रतिशत तथा धौलपुर एवं सवाई माधोपुर सर्किल ने 103.71 प्रतिशत की वसूली की है। इसी प्रकार बारां ने 103.19 प्रतिशत, डीग ने 102.55 प्रतिशत, दौसा ने 102.36 प्रतिशत, जयपुर सिटी साउथ ने 102.05 प्रतिशत, जयपुर सिटी नॉर्थ ने 102 प्रतिशत, टोंक एवं झालावाड़ ने 101.77 प्रतिशत, अलवर ने 101.46 प्रतिशत, कोटपूतली ने 101.08 प्रतिशत, जयपुर जिला उत्तर ने 101 प्रतिशत, जयपुर जिला दक्षिण ने 100.50 प्रतिशत तथा भिवाड़ी ने 100.52 प्रतिशत राजस्व संग्रहित किया है।

📊 साल दर साल राजस्व अर्जन (जयपुर डिस्कॉम)

क्रम संख्यावर्षराजस्व अर्जन (%)
12004-0599.68%
22005-0699.25%
32006-0799.53%
42007-0898.97%
52008-0999.24%
62009-1098.25%
72010-1199.19%
82011-1298.49%
92012-1397.75%
102013-1496.08%
112014-1597.76%
122015-1698.44%
132016-1798.36%
142017-18101.02%
152018-1998.41%
162019-2096.34%
172020-2197.51%
182021-22100.88%
192022-23100.66%
202023-24100.41%
212024-25100.79%

सुनिश्चित की शत-प्रतिशत बिलिंग, पीडीसी उपभोक्ताओं से की रिकवरी

जयपुर डिस्कॉम ने शत-प्रतिशत बिलिंग तथा रेवेन्यू रिकवरी को सम्पूर्ण वित्त वर्ष में प्राथमिकता दी। सर्वाधिक छीजत वाले एवं राजस्व वसूली में पिछड़े सब डिविजनों की नियमित मॉनीटरिंग की गई। इसके लिए मुख्यालय से लेखा शाखा के अधिकारी प्रत्येक सर्किल में नोडल अधिकारी के रूप में लगाए गए। उन्होंने सब डिविजन स्तर तक बिलिंग एवं राजस्व वसूली में आ रही बाधाओं को चिन्हित किया। जलदाय, पंचायतीराज, नगरीय निकायों आदि पर बकाया बिल जमा कराने के लिए अन्तर्विभागीय प्रयास किए गए। इसके अलावा 50 हजार रूपए एवं 20 हजार रूपए से अधिक बकाया वाले पीडीसी उपभोक्ताओं की सूची तैयार कर उनसे रिकवरी के सभी प्रयास सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई। इन सभी प्रयासों का असर रहा कि निगम ने इस बार सर्वाधिक राजस्व संग्रहण किया।

सभी सर्किल हुए जीरो डिफेक्टिव मीटर

राजस्व अर्जन में सभी सर्किलों को जीरो डिफेक्टिव मीटर बनाने का भी बड़ा बड़ा योगदान है। पहली बार जयपुर डिस्कॉम के सभी सर्किल न केवल डिफेक्टिव मीटर मुक्त किए गए बल्कि उन्हें लगातार खराब मीटरों की समस्या से मुक्त बनाए रखा जा रहा है। इससे एवरेज बिलिंग पर अंकुश लगा और उपभोग के आधार पर शत-प्रतिशत बिलिंग हो रही है।

वितरण एवं एटीएंडसी हानियां न्यूनतम स्तर पर

कलेक्शन एफिशिएंसी बढ़ाने के साथ ही निगम ने विद्युत तंत्र को सुदृढ़ करने पर भी पूरा जोर दिया है। कुसुम एवं पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से सस्ती सौर ऊर्जा का लाभ हर खेत एवं हर घर तक पहुंचाया जा रहा है। आरडीएसएस योजना को गति देकर विद्युत तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम की वितरण हानियां 11.02 प्रतिशत तथा एटीएंडसी हानियां भी अब तक के न्यूनतम 9.24 प्रतिशत के स्तर पर आ गई हैं।

Updated on:
01 Apr 2026 08:28 pm
Published on:
01 Apr 2026 08:27 pm