
Medical Claims: जयपुर. राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अनावश्यक जांचों और संदिग्ध क्लेम पर रोक लगाने के लिए लागू की गई प्री-अथराइजेशन व्यवस्था का असर सामने आया है। 15 जुलाई से लागू व्यवस्था के बाद योजना के तहत क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ₹2,000 से अधिक की जांचों के लिए प्री-अथराइजेशन अनिवार्य किए जाने के साथ ही डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए अस्पतालों और चिकित्सकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के साथ योजना के नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी विभाग की प्राथमिकता है। RGHS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि डिजिटल सिस्टम के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
RGHS की प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार मॉनिटरिंग में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें ₹2,000 से अधिक की जांचों को प्री-अथराइजेशन से बाहर रखने के लिए एक ही दिन में कराने वाली जांचों को अलग-अलग दिनों में लिखे जाने की आशंका मिली। कुछ मरीजों को तीन दिन के भीतर अलग-अलग जांचों के लिए बार-बार अस्पताल बुलाया गया। विभाग ने डिजिटल निगरानी के जरिए ऐसे मामलों की पहचान शुरू की है।
जांच के आधार पर अब तक अस्पतालों का TMS और 3 डॉक्टरों की डॉक्टर ID ब्लॉक की गई है। कोटा के दो अस्पतालों में एक ही चिकित्सक के एक ही दिन दोनों जगह काम करने का मामला सामने आया। संबंधित डॉक्टर की आईडी भी ब्लॉक की गई है।
अलवर में एक डॉक्टर के नाम से जारी प्रिस्क्रिप्शन में अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर पाए गए। एक अन्य अस्पताल में कई OPD प्रिस्क्रिप्शन पर डॉक्टर की सील और सिग्नेचर का समान पैटर्न सामने आया। जोधपुर में भी एक चिकित्सक के नाम से दो अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर पैटर्न पाए गए।
दौसा में एक अस्पताल द्वारा पर्याप्त क्लिनिकल फाइंडिंग और जस्टिफिकेशन के बिना जांचें लिखने का मामला सामने आया। वहीं दूसरे अस्पताल में डिजिटल और मैनुअल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर में अंतर सहित अन्य अनियमितताएं मिलीं।
अलवर में करीब 65 मामलों में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल लिखे जाने और कई मामलों में पर्याप्त क्लिनिकल इंडिकेशन दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। कई मामलों में सीरम आयरन जांच भी स्पष्ट लक्षण या डायग्नोसिस के बिना लिखी गई।
बीकानेर, जयपुर और उदयपुर से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य RGHS में पारदर्शिता बढ़ाना, अनावश्यक जांचों पर रोक लगाना और मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।