
Jaipur : जयपुर में टोंक रोड पर बीटू बाईपास और सांगानेर के बीच जयपुर-सवाई माधोपुर रेलवे लाइन के पास प्रस्तावित राजस्थान मंडपम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां पहले से संचालित जेम स्टोन पार्क की 11 औद्योगिक इकाइयों को रीको ने 30 अगस्त तक जगह खाली करने का नोटिस दिया है। इसके बाद उद्यमियों और श्रमिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इकाइयों को बचाने की मांग की है। सरकार ने करीब 105 एकड़ जमीन पर दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज पर राजस्थान मंडपम विकसित करने की घोषणा की है।
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 5800 करोड़ रुपए बताई गई है और इसके लिए 2268 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के टेंडर भी जारी हो चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि इस बड़े क्षेत्र में राजस्थान मंडपम के साथ मौजूदा जेम स्टोन उद्योगों के लिए भी जगह निकाली जा सकती है।
जेम पार्क के उद्यमी राजेश वधवा का कहना है कि राजस्थान मंडपम के लिए 105 एकड़ का विशाल क्षेत्र प्रस्तावित है। इसमें से करीब 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में जेम पार्क विकसित किया जा सकता है।
2023 फिनटेक पार्क की घोषणा।
2024 यूनिटी मॉल।
2026 राजस्थान मंडपम के लिए टेंडर जारी।
जेम पार्क में चल रही इकाइयों को हटाने की कोशिश 2015 में भी हुई थी। हालांकि मामला कोर्ट ऑफ स्टेट ऑफिसर्स में लंबित होने के कारण उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर बेदखली का नोटिस मिलने से उद्यमियों में चिंता है।
उद्यमी राजीव पोखरना का कहना है कि उन्होंने सरकार की स्वीकृत जेम पार्क योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर भूखंड लिया था और आवंटन की पूरी राशि जमा कराई। अब 30 जुलाई को रीको ने 30 अगस्त तक बेदखली का नोटिस दिया है। नोटिस में न तो मुआवजे का उल्लेख है और न ही वैकल्पिक स्थान पर इकाई लगाने की व्यवस्था की गई है।
उद्यमियों के अनुसार 1986 में मुंबई की कंपनी डीजीजीसी ने जेम पार्क विकसित करने के लिए रीको से 35 एकड़ जमीन मांगी थी। बाद में करीब 105 एकड़ जमीन आवंटित की गई। कंपनी ने जेम स्टोन उद्योग के लिए करीब 700 भूखंडों की बुकिंग की, लेकिन करीब 70 आवंटन ही हो सके। इनमें से 30-35 उद्यमियों ने इकाइयां स्थापित कर काम शुरू किया। उद्यमियों का कहना है कि पानी, बिजली, सड़क और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण पार्क अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हो सका।