जयपुर विकास प्राधिकरण और एनएचएआई के बीच सचिवालय में 'रिंग रोड' काे लेकर एमओयू होगा।
15 महीने में तैयार!
एनएचएआई का दावा है कि रिंग रोड को 15 महीने में तैयार कर दिया जाएगा।
अफसरों की लापरवाही की बानगी
24 जून 2011 को कंपनी व जेडीए के बीच हुआ था अनुबंध
21 माह
में बननी थी रिंग रोड, 73 माह बाद भी 15 फीसदी काम भी नहीं हुआ
42 माह
में केवल जमीन का ज्यादातर हिस्सा अवाप्त किया गया (अनुबंध तिथि से)
30 माह
लग गए रिंग रोड को एनएचएआई को ट्रांसफर करने में
890 करोड़ थी लागत, जो बढ़कर 1200 करोड़ हो गई
कौन देगा ब्याज के 7 करोड़ रुपए
सेटलमेंट कमेटी को कंपनी की ओर से सौंपा गया ब्यौरा अप्रेल 2017 तक का था। इसमें ब्याज राशि भी जोड़ी गई। कमेटी ने 6 जुलाई को क्लेम पास किए लेकिन उसके बाद 3 माह तक ब्याज बैंक मांग रहा है। यह ब्याज कंपनी को देना है लेकिन ऐसी स्थिति नहीं बन रही। क्योंकि जेडीए और सरकार के स्तर पर हुई देर का खामयाजा भुगतने से कंपनी ने इनकार कर दिया है। ऐसे में ब्याज के करीब 7 करोड़ रुपए जेडीए या एनएचएआई को ही चुकाने होंगे। इसे लेकर अभी विवाद बना हुआ है।