
राजस्थान के नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने देश की स्वास्थ्य अनुसंधान व्यवस्था और इसके बजट आवंटन को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। लोकसभा में सांसद बेनीवाल द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मुकाबले स्वास्थ्य अनुसंधान पर बेहद कम राशि खर्च की जाती है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) पर व्यय होने वाला बजट वर्तमान में जीडीपी का मात्र 0.012% है।
सांसद बेनीवाल ने सरकार के इस जवाब को अधूरा और असंतोषजनक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार यह बताने में पूरी तरह विफल रही कि विकसित देशों की तुलना में भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान पर होने वाले इस भारी अंतर को कब और किस तरह से कम किया जाएगा।
नागौर सांसद ने संसद में सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तर की कमियों को उजागर करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार ने अपने लिखित उत्तर में स्वास्थ्य अनुसंधान बजट में बढ़ोतरी का दावा तो किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इस आवंटन से किन-किन स्वास्थ्य संकेतकों या रिसर्च परिणामों में सुधार आया है।
सरकार का तर्क है कि कोई परियोजना लंबित नहीं है क्योंकि स्वीकृतियां उपलब्ध बजट के अनुसार ही दी जाती हैं। बेनीवाल ने कहा कि इसका सीधा अर्थ यह है कि फंड की कमी के कारण दर्जनों योग्य प्रस्तावों को शुरू में ही मंजूरी नहीं मिल पाती। सरकार ने ऐसे खारिज या स्वीकृत न हो पाने वाले योग्य प्रस्तावों का कोई भी आधिकारिक आंकड़ा संसद के पटल पर नहीं रखा।
संसद में पूछे गए सवाल में आरएलपी सांसद ने देश के सभी प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों का विस्तृत विवरण मांगा था। बेनीवाल ने बताया कि उन्होंने प्रश्न में देश के तमाम स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति का ब्योरा मांगा था, लेकिन उत्तर में केवल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का विवरण ही दिया गया। देश के अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों की वर्तमान स्थिति और उन्हें मिलने वाले बजट का कोई उल्लेख जवाब में पूरी तरह से गायब रहा।
लोकसभा में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा दिए गए उत्तर पर नागौर सांसद ने सवाल उठाते हुए विस्तृत ब्योरे की मांग की। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने अपने जवाब में देश में प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक उपकरणों के उन्नयन की बात कही थी।
सांसद ने पलटवार करते हुए पूछा कि देश में कितनी प्रयोगशालाओं का वास्तव में आधुनिकीकरण हुआ है? इसके लिए कितना बजट खर्च किया गया? और किन-किन संस्थानों को इसका सीधा लाभ मिला? इसकी कोई भी ठोस जानकारी संसद के पटल पर नहीं दी गई।
सांसद हनुमान बेनीवाल का कहना है कि स्वास्थ्य अनुसंधान पर जीडीपी का मात्र 0.012% खर्च होना देश के नागरिकों की सेहत और चिकित्सा सुरक्षा के लिए चिंताजनक है। राजस्थान सहित पूरे देश में नई बीमारियों, कैंसर, टीबी और दुर्लभ रोगों पर आधुनिक रिसर्च के लिए हाई-टेक लैब्स और भारी बजट की आवश्यकता है।
बेनीवाल ने कहा कि वह राजस्थान के लोगों की आवाज और देश के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।