Rajasthan News : यह बात 29 जनवरी 2002 की है, मंगलवार का दिन था, शाम के लगभग 5.15 का समय रहा होगा। मैं 9 साल का था, मुझे अंदाजा नहीं था कि अगला ही मिनट मेरी जिंदगी में इतना बड़ा बदलाव लेकर आएगा।
Rajasthan News : यह बात 29 जनवरी 2002 की है, मंगलवार का दिन था, शाम के लगभग 5.15 का समय रहा होगा। मैं 9 साल का था, मुझे अंदाजा नहीं था कि अगला ही मिनट मेरी जिंदगी में इतना बड़ा बदलाव लेकर आएगा। दिनभर से बिजली नहीं आ रही थी। हम परिवार के लोग छत पर बैढ़े थे, बिजली आने का ही इंतजार कर रहे थे। तभी मैंने एक कटी पतंग को मेरे घर की तरफ आते देखा। पतंग घर के सामने हाइटेंशन लाइन में जाकर उलझ गई। मुझे पतंग उड़ाने का शौक था, तो मैं पतंग को उतारने के लिए मशकक्त करने लगा। पहले लकड़ी से पतंग लेने की कोशिश की लेकिन उसकी लंबाई कम थी, तो मैंने पतंग की डोर को पकड़ने के लिए सरिए का इस्तेमाल करने का सोचा। यही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। सरिए में अर्थिंग की वजह से करंट दौड़ गया इसके बाद मुझे जब होश आया तब मैं एसएमएस अस्पताल में था। यह कहानी है। रोशन नागर की, जिन्होंने हौंसलों और आत्मबल के दम पर अपनी जिंदगी के मायने बदल दिए हैं। रोशन ने पत्रिका सवांददाता से बातचीत में बताया की अभी मेरी सवाई माधोपुर में बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के रीजनल ऑफिस में सहायक प्रबंधक के रूप में कार्यरत हूं । रोशन कविताएं लिखने के साथ- साथ मोटीवेशनल स्पीकर और गुलशन चैरिटेबल ट्रस्ट के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में लोगों की मदद के लिए कार्य कर रहे हैं।
इंफेक्शन होने से काटने पड़े दोनों हाथ और दायां पैर
घटना के दौरान रोशन ने दोनों हाथों से सरिए को पकड़ा हुआ तो था ही, साथ ही दाएं पैर के नीचे पड़े सरिए के कारण करंट पैर तक पहुंच गया था। इस कारण उनके शरीर के इन तीन अंगों का खून पूरी तरह से जल गया। रोशन बताते हैं, जब वे अस्पताल में थे। तब उनके केस को देखकर डाक्टर्स का कहना था, कि यह बच्चा शायद ही जीवित रह पाएगा। परिवारजनों ने डॉक्टर्स से गुहार लगाई कि वे किसी तरह से हाथों और पैर को बचा लें। 2-3 दिन चिकित्सक इसी प्रयास में रहे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है। तो उन्होंने परिवारजनों को चेताया कि अब थोड़ा भी इंतजार करना बच्चे की जान को जोखिम ड़ालने के समान होगा। इंफेक्शन का खतरा बढ़ रहा था। और रोशन का ऑपरेशन किया गया जिसमें उनके दोनों हाथ और पैर को काट दिया गया।
जीवन बदलने का लिया प्रण
धीरे- धीरे जीवन सामान्य हो रहा था, लेकिन परिवार रोशन के भविष्य को लेकर काफी चिंतित था। इसी सिलसिले में वे महावीर विकलांग समिति में पैर लगवाने के लिए गए। वहीं रोशन ने प्रण लिया कि वे कंधे से बचे हुए 4-4 इंच के हाथों के सहारे ही अपने जीवन को बदलेंगे। उसी दिन सबसे पहले लिखने की कोशिश की गई जिसमें उन्हें काफी दिक्कत तो हुई लेकिन रोशन अपना निर्णय ले चुके थे। इसी के बाद निरंतर अभ्यास से उन्होंने बिना किसी मदद के आठवीं, दसवीं और बारहवीं बोर्ड परिक्षाओं में क्रमशः 70, 65 और 62 प्रतिशत अंक हासिल किए।
संघर्ष किया और बने अधिकारी
रोशन ने सरकारी नौकरी पाने के काफी प्रयास किए, कई परीक्षाओं के प्री पास करने में सफल हुए लेकिन दूसरे चरण में असफल हो जाते। उन्होंने हार मानने की बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। जुलाई 2021 में उन्हें बड़ौदा- राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में सहायक प्रबंधक के रूप में नौकरी प्राप्त हुई।