
जयपुर। निजता के संरक्षण को लेकर लंबी चुप्पी के बाद केन्द्र सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन विधेयक का मसौदा जारी कर दिया है। विधेयक में निजता को संरक्षण के नाम पर सूचना का अधिकार आरटीआई में संशोधन का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिसको लेकर सूचना का अधिकार कानून के लिए संघर्षरत रहे कार्यकर्ताओं की चेतावनी है कि संशोधन के नाम पर आरटीआई को कमजोर करने का प्रयास हुआ तो जबरदस्त विरोध होगा। इन कार्यकर्ताओं को अंदेशा है कि लोक सूचना अधिकारी को ऐसा अधिकार दिया तो 80 फीसदी सूचनाएं मिल ही नहीं पाएंगी।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन विधेयक के मसौदे की धारा 30(2) में आरटीआई अधिनियम की धारा 8(जे) में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसके जरिए आरटीआई में व्यक्तिगत जानकारी देने पर पाबंदी लगाई जाएगी। आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (जे) में कहा है कि व्यक्तिगत सूचना से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, यदि उस सूचना का जनहित से कोई संबंध नहीं है। सूचना जनहित में होने पर लोक सूचना अधिकारी को गोपनीयता के तर्क को खारिज करने का अधिकार दिया गया है। ।
आरटीआई कहता है
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 (जे) कहती है कि व्यक्तिगत जानकारी जिसे संसद या राज्य विधानमंडल से इनकार नहीं किया जा सकता है, उसे आरटीआई में भी देने से इंकार नहीं किया जा सकता।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन विधेयक कहता है
विधेयक मेे व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।इसको लेकर विधेयक की धारा 30 में प्रावधान जोडा गया है कि सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से कोई संबंध नहीं रखने वाली और निजता के विपरीत सूचना को सार्वजनिक करने से रोका जा सकेगा। आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (जे) के परन्तुक के जरिए दी जाने वाली सूचनाओं को भी रोका जा सकेगा।
दूसरे देशों का किया जा रहा अध्ययन
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन विधेयक को लेकर सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और यूएसए के प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है।
यों आ रहे विरोध के स्वर
आरटीआई कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी का मानना है कि संशोधन के बाद कंपनी, संस्थाओं से संबंधित सूचना लेना मुश्किल हो जाएगा। यहां तक कि राजस्थान का जनसूचना पोर्टल लगभग खत्म हो जाएगा। अस्सी प्रतिशत सूचनाएं किसी व्यक्ति से संबंधित होती है, जो संशोधन के बाद लेना मुश्किल हो जाएगी। पांच साल बाद तो आरटीआइ का उद्देश्य ही निरर्थक हो जाएगा। ऐसे में संशोधन को राजनीतिक मुद्दा बनाने की जरुरत है।
सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने सूचना का अधिकार कानून में संशोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संशोधन के बाद सूचना जनहित में जरूरी होने के बावजूद नहीं मिल पाएगी। आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (जे) निजता को संरक्षण देती है, ऐसे में निजता को जनहित से उपर नहीं रखा जा सकता। आरटीआई कमजोर करने के प्रयासों के विरोध में जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा।