धरती पर ईश्वर का ही रूप है संत

निकटवर्ती माणकी गांव स्थित संकट मोचक हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित विश्वभरण मिश्र शास्त्री ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जीवन में चार पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति के लिए विवाह संस्कार करवाया जाता है। जहां दो आत्माएं एक-दूसरे के लिए […]

2 min read
Apr 12, 2016
hari katha

निकटवर्ती माणकी गांव स्थित संकट मोचक हनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित विश्वभरण मिश्र शास्त्री ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जीवन में चार पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति के लिए विवाह संस्कार करवाया जाता है। जहां दो आत्माएं एक-दूसरे के लिए अपना समर्पण करतीं हैं। नारी की महानता बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी सफल पुरुषों के पीछे नारियों का हाथ रहा है। देवभूमि भारत में ऐसी कई नारियां हुई हैं जो यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ले लिए। इनमें सत्यवान सावित्री की कथा जगत प्रसिद्ध है। शिव पार्वती संवाद सुनाते हुए शास्त्री ने कहा कि पार्वति को राम कथा अति प्रिय है। वे आत्म संतुष्टि के लिए महादेव से रामकथा का श्रवण करतीं है। उन्होंने संत की महिमा बताते हुए कहा कि संत धरती पर ईश्वर का ही स्वरूप है। जिन्हें सच्चे संतों का संग मिल जाता है, वह भव सागर से सहज ही पार हो जाते हैं। आचार्य संत गोवर्धनराम शिक्षा शास्त्री ने कहा कि संसार में धन ही सबकुछ नहीं है। इससे सुख के साधन खरीदेे जा सकते हैं, लेकिन सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। सुख के लिए हमें अंतर्मुखी होना पड़ेगा। सोनड़ी धाम के महंत हरिदास ने कहा कि आत्मा ही परमात्मा का स्वरूप है।

राम चले वनवास
ऐसे ही निकटवर्ती राणासर खुर्द स्थित जसनाथ आश्रम परिसर में सती काळदे माता मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर चल रही रामकथा में जनसैलाब उमड़ा। कथावाचक प्रेमहरि महाराज ने सोमवार को राम, लक्ष्मण व सीता के वनवास का प्रसंग सुनाया। उन्होंने केकई के राजा दशरथ से दो वचन मांगने तथा राम को 14 वर्ष के वनवास की कथा सुनाई। इस दौरान श्रोता भावविभोर हो गए। कथा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पांडाल में मौजूद रहे। 5 अप्रेल से महंत जोगनाथ महाराज के सान्निध्य में चल रही राम कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर चल रहे 21 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ में कई यजमानों ने आहुतियां दी। निसं.

अहंकार से रहे दूर
शिव. निकटवर्ती गूंगा गांव में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक संतोष सागर ने कहा कि बहू व बेटी में भेद नहीं करना चाहिए। दुनिया में थोड़े-थोड़े दु:खी सभी लोग होते हैं। सुखी वही है जो भगवान का दास है। अनसूईया माता के घर ब्रह्मा, विष्णु व महेश के जन्म का वृतांत सुनाया। मीरां-कृष्ण के प्रेम की झांकी का दर्शन भी कराया। इस दौरान अपने पिया की म्हें तो भई रे जोगनियां..., गोविंद मेरो है, गोपाल भी मेरो है..., कन्या मैं तेरी चरणों की दासी... तथा सांवरिया मुझे ले चलो वृंदावन... जैसे भजनों की प्रस्तुतियां दी। उन्होंने कहा कि शराब का नशा रात को चढ़ा सवेरे उतर जाता है, लेकिन भक्ति का नशा पूरी जिन्दगी रहता है। भारतीय नारी पति का अपमान कदापि सहन नहीं करती। जिस घर में शंकर भगवान की पूजा होती है उस घर में काल, क्रोध नहीं होता तथा नीति से कमाया धन भी नष्ट नहीं होता। रात को नैनीबाई रो मायरो कथा हुई इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

Published on:
12 Apr 2016 01:45 am
Also Read
View All