जयपुर

उपग्रह छोडऩा आसान, पूर्वाग्रह छोडऩा कठिन : आचार्य राजरक्षितसूरि

Aug 04, 2026
Rajasthan

धर्मसभा में आत्मविकास, समभाव और जैनाचार के पालन का दिया संदेश

दावणगेरे। श्री सुपाश्र्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, दावणगेरे में आयोजित धर्मसभा में आचार्य राजरक्षितसूरि ने कहा कि आकाश में उपग्रह छोडऩा आसान है, लेकिन मन से पूर्वाग्रह छोडऩा अत्यंत कठिन है। मनुष्य का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वह हठ, कदाग्रह और पूर्वाग्रह का त्याग कर सत्य को अपनाए।

तत्त्वार्थसूत्र कारिका ग्रंथ पर प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि इसके रचयिता आचार्य उमास्वाति जन्म से ब्राह्मण थे, किंतु अरिहंत परमात्मा की प्रतिमा के दर्शन से उन्हें आत्मबोध हुआ। इसके बाद उन्होंने दीक्षा ग्रहण कर आगमों का गहन अध्ययन किया तथा तत्त्वार्थसूत्र, प्रशमरति सहित लगभग 500 ग्रंथों की रचना कर जैन दर्शन को नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि केवल जन्म से जैन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आचरण से भी जैन धर्म का पालन करना आवश्यक है। आज भारत के साथ-साथ अमरीका, जापान, दुबई और ब्रिटेन में रहने वाले अनेक जैन श्रद्धालु रात्रिभोजन, कंदमूल और अभक्ष्य पदार्थों का त्याग कर जैनाचार का निष्ठापूर्वक पालन कर रहे हैं।

आचार्य ने कहा कि "मेरा ही सत्य है" के बजाय "जो सत्य है, वही मेरा है" की भावना अपनानी चाहिए। उन्होंने जमाली, रोहगुप्त, संगम और अज्जा साध्वी के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वाग्रह परिवारों में बढ़ती अशांति का प्रमुख कारण बनता है। इस अवसर पर बताया गया कि युवा प्रवचनकार पंडित नयरक्षित विजय के रात्रिकालीन प्रवचनों में प्रतिदिन 900 से 1,000 श्रद्धालु और युवा नियमित रूप से भाग ले रहे हैं।

Updated on:
04 Aug 2026 06:01 am
Published on:
04 Aug 2026 06:01 am