जयपुर

She News – डिप्रेशन से बाहर आ अहसासों से घर सजा रही ‘रंगसाजी’

जिस पर बेहद कम बात की जाती है क्योंकि इस बारे में हम जानते ही नहीं इसलिए मैं इस पर बात करती हंू। यह कहना है रंगसाजी की फाउंडर एकता नाहर का जो आर्टिस्ट होने के साथ ही राइटर और मोटिवेटर भी हैं।
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Feb 17, 2024
She News - डिप्रेशन से बाहर आ अहसासों से घर सजा रही ‘रंगसाजी’
She News - डिप्रेशन से बाहर आ अहसासों से घर सजा रही ‘रंगसाजी’

जिस पर बेहद कम बात की जाती है क्योंकि इस बारे में हम जानते ही नहीं इसलिए मैं इस पर बात करती हंू। यह कहना है रंगसाजी की फाउंडर एकता नाहर का जो आर्टिस्ट होने के साथ ही राइटर और मोटिवेटर भी हैं। तीन साल तक डिप्रेशन में रह चुकी एकता मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव दतियां की रहने वाली हंै। कई मीडिया हाउस में कंटेट राइटर के रूप में काम कर चुकी एकता के साथ शादी के बाद शुरू हुआ यातना का सिलसिला। आखिरकार एक दिन घर छोड़ दिया और दिल्ली जा पंहुची। परिवार और दोस्तों से दूर अकेले वह कब डिप्रेशन में चली गईं, उन्हें पता नहीं चला। कई बार आत्महत्या का खयाल भी आया। डिप्रेशन से बाहर आने में एकता का साथ दिया रंगों और सिंगर आशीष धामी ने। रंगों से खेलने का शौक एकता बचपन से था, लेकिन वह यह भूल गई थीं। जब आशीष और रंग उनकी लाइफ में आए तो वह न केवल डिप्रेशन से बाहर आईं बल्कि उन्होंने शुरुआत की रंगसाजी की। अपने बनाए हैंडीक्राफ्ट्स आइटम्स को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। रिस्पॉन्स अच्छा मिला। इसी के साथ शुरुआत हुई उनके स्टार्टअप रंगसाजी की। आज वह इसी के जरिए घरोंं को एहसासों से सजा रही हैं।

सूली पर महिलाएं
एकता ने अपना काम वेस्ट मैटेरियल से शुरू किया। वह नेल पेंट की बोतल, लकड़ी के टुकड़े, बेकार डिब्बे आदि को रंगों से सजाती हैं, जिनकी डिमांड आज देश विदेश में है। उन्हें पढऩे का भी बेहद शौक है। उन्होंने महिला मुद्दों को लेकर एक किताब सूली पर महिलाएं भी लिखी हैं। इसमें महिलाओं के जीवन, उनके संघर्ष, उनके साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र किया गया है। एकता कहती हैं कि जो सपना हम देखते हैं अगर उसे जीना है तो शिद्दत से उसे पूरा करने में जुट जाएं।

मेंटल हैल्थ पर बात

अब एकता हैंडीक्राफ्ट आइटम्स बनाने के साथ ही मेंटल हैल्थ पर बात करती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में वह अपने क्राफ्ट की प्रदर्शनी लगा चुकी हंै। उनका कहना है कि मेंटल हैल्थ पर बात नहीं की जाती। हमें पता नहीं चलता कि कब हम मानसिक अवसाद के शिकार हो गए। ऐसे में अवेयरनेस जरूरी है। जब तक लोग इसके बारे में जानेंगे नहीं न वह खुद की मदद कर सकेंगे और न ही अपने जैसे दूसरे लोगों की कोई मदद कर सकेंगे।

Published on:
17 Feb 2024 03:09 pm
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