
Mirzapur Movie Controversy - File PIC
बॉलीवुड फिल्म 'मिर्जापुर' के एक विवादित सीन और उसमें इस्तेमाल किए गए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले गाने को लेकर उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ अंचल में आक्रोश की लहर फैल गई है। फिल्म के एक प्रमुख गैंगस्टर वॉर सीन में मुन्ना त्रिपाठी और गुड्डू भैया जैसे काल्पनिक आपराधिक किरदारों की हिंसा को ग्लोरिफाई करने के लिए राजस्थान के मशहूर सिंगर रैपरिया बालम के महाराणा प्रताप के शौर्य, हल्दीघाटी युद्ध और चेतक की वीरता पर आधारित लोकप्रिय गीत 'शूरवीर' का बैकग्राउंड में इस्तेमाल किया गया है। इस विवादित सीन पर मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, प्रसिद्ध इतिहासकारों और खुद सिंगर ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन सभी ने फिल्म निर्माताओं को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित सीन और गाने को तुरंत नहीं हटाया गया, तो निर्माताओं को मेवाड़ और पूरे देश में कड़े जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
ओटीटी (OTT) पर वेब सीरीज की सफलता के बाद बनाई गई फिल्म 'मिर्जापुर' के निर्माता रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, कासिम जगमगिया और निर्देशक गुरमीत सिंह, मिहिर देसाई हैं। फिल्म में गैंगस्टर वॉर का एक हिंसक दृश्य फिल्माया गया है। इसमें दोनों ओर से गैंगस्टर आपस में लड़ रहे हैं और गोलियां चला रहे हैं। दृश्य के पीछे 'शूरवीर' गाना बजाया गया है, जिसके बोल महाराणा प्रताप के राष्ट्रप्रेम, त्याग और हल्दीघाटी के युद्ध में उनकी वीरता का बखान करते हैं।
मेवाड़ के लोगों का आरोप है कि गाली देने वाले, नशा करने वाले और महिलाओं के साथ अनैतिक व्यवहार करने वाले हिंसक किरदारों के पीछे महाराणा प्रताप का नाम जोड़ना पूरी तरह से निंदनीय और अनैतिक है।
पूर्व राजपरिवार के सदस्य और मेवाड़ के प्रमुख व्यक्तित्व डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए फिल्म निर्माताओं को उनकी सामाजिक और कलात्मक जिम्मेदारी याद दिलाई है।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि अगर लोगों को क्रिएटिव लाइसेंस मिल जाता है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे अपनी नैतिक जिम्मेदारी से भाग सकते हैं। कला का पहला धर्म यह है कि वह लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करे। फिल्म मेकर्स को यह बात हल्के में नहीं लेनी चाहिए कि महाराणा प्रताप हमारे और पूरे राष्ट्र के आराध्य हैं।
'शूरवीर' गाने के मूल गायक और संगीतकार रैपरिया बालम ने भी मेकर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोडक्शन हाउस ने इस गाने के इस्तेमाल के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली थी।
रैपरिया बालम ने कहा कि इस गाने का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को महाराणा प्रताप के नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और शौर्य से अवगत कराना था। अगर मेकर्स उनसे इजाजत मांगते, तब भी वे ऐसे अनैतिक और हिंसक दृश्य के लिए कभी अनुमति नहीं देते।
सिंगर ने बताया कि उन्होंने प्रोडक्शन हाउस को औपचारिक लीगल नोटिस भेज दिया है और जब तक फिल्म से यह गाना नहीं हटाया जाता, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
महाराणा प्रताप पर गहन शोध करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने भी इस दृश्य पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है।
डॉ. शर्मा का कहना है कि महाराणा प्रताप के चरित्र की सबसे बड़ी पहचान उनका नैतिक बोध और मातृभूमि के प्रति उनका मूल्य-आधारित संघर्ष था।
अनैतिक और आपराधिक पृष्ठभूमि पर बनी किसी काल्पनिक गैंगवार फिल्म में महाराणा प्रताप के नाम को जोड़ना सांस्कृतिक अपराध है। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC/सेंसर बोर्ड) से इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेने और सीन को हटाने की मांग की है।
Updated on:
09 Sept 2026 02:24 pm
Published on:
09 Sept 2026 02:24 pm
