
Sachin Pilot and Sukhjinder Randhawa - File PIC
कांग्रेस के हालिया संगठनात्मक फेरबदल के बाद राष्ट्रीय राजनीति और विशेष रूप से राजस्थान-पंजाब के सियासी गलियारों में दो दिग्गज नेताओं- सचिन पायलट और सुखजिंदर सिंह रंधावा को लेकर एक दिलचस्प और अनोखा 'पॉलिटिकल कनेक्शन' यानी भूमिकाओं की अदला-बदली चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। दरअसल, कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया है, जिसके बाद अब सत्ता और जवाबदेही के समीकरण पूरी तरह से उलट गए हैं। जहां पंजाब के वरिष्ठ नेता और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा लंबे समय से राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी के रूप में सचिन पायलट के फैसलों पर नजर रखते आए हैं, वहीं अब पंजाब के राजनीतिक मामलों और संगठनात्मक फैसलों में खुद सचिन पायलट, रंधावा के प्रशासनिक प्रमुख यानी 'बॉस' की भूमिका में आ गए हैं, जिसने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले दोनों राज्यों के कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कांग्रेस के इस नए सांगठनिक ढांचे ने एक ऐसा दुर्लभ ढांचा खड़ा कर दिया है, जहां दोनों नेता अपने-अपने गृह राज्य में एक-दूसरे के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। आसान शब्दों में कहें तो सचिन पायलट राजस्थान के फैसलों के लिए रंधावा से मार्गदर्शन लेते हैं, जबकि पंजाब के मामलों में रंधावा को सचिन पायलट के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सचिन पायलट को पंजाब का AICC जनरल सेक्रेटरी इन-चार्ज नियुक्त किया है। चूंकि सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद हैं, इसलिए पंजाब के राज्य स्तरीय मामलों में रंधावा अब सचिन पायलट को रिपोर्ट करेंगे।
सुखजिंदर सिंह रंधावा राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राजस्थान में सचिन पायलट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री हैं। लिहाजा, राजस्थान के संगठनात्मक मामलों में रंधावा, पायलट के प्रभारी बने रहेंगे।
यह इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींच रहा है क्योंकि कुछ समय पहले जब राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी कलह चरम पर थी, तब रंधावा की भूमिका बेहद संवेदनशील थी। जब सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन और रैलियां कर रहे थे, तब बतौर राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा उन पर और उनके बयानों पर पैनी नजर रख रहे थे। उस दौरान रंधावा ने अनुशासन को लेकर कई कड़े बयान जारी किए थे और आलाकमान तक रिपोर्ट सौंपी थी।
अब ठीक वैसा ही दौर पंजाब कांग्रेस में चल रहा है। चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग खेमों के बीच जारी गुटबाजी को शांत करने और रंधावा जैसे कद्दावर नेताओं को एक मंच पर लाने की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट के कंधों पर है।
राजनीतिक शिष्टाचार का परिचय देते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोशल मीडिया पर सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। रंधावा ने लिखा कि सचिन पायलट का लंबा सांगठनिक अनुभव, गतिशील नेतृत्व और जनता से गहरा जुड़ाव पंजाब में कांग्रेस संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देगा।
इधर, नई जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद सचिन पायलट ने भी पंजाब के सभी प्रमुख धड़ों से बातचीत की और एकजुट होकर 2027 के चुनावों की तैयारी करने की अपील की है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव (2027) से ठीक पहले आलाकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को लाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पंजाब में गुटबाजी इतनी बढ़ चुकी थी कि पुराने प्रभारी पर पक्षपात के आरोप लग रहे थे। ऐसे में सचिन पायलट को एक न्यूट्रल और युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
खास बात यह भी है कि भाजपा ने भी राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया हुआ है। अब कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट के आने से पंजाब में राजस्थान के दो दिग्गजों के बीच भी रणनीतिक जंग देखने को मिलेगी।
Updated on:
09 Sept 2026 11:24 am
Published on:
09 Sept 2026 11:15 am
