
जयपुर।
राजधानी जयपुर में मंगलवार को एक फर्म संचालक को बिटकॉइन व आईटी एक्ट में फंसाने की धमकी देकर 5 लाख रु. की रिश्वत लेने के मामले में एसीबी शिप्रापथ थाने में तैनात महिला सब इंस्पेक्टर बबीता और उसके वकील पति को अमरदीप को आज कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया जाएगा। एसीबी आज बबीता व उसके पति के बैंक अकाउंट की भी जांच करेंगी।
बिटकॉइन और IT एक्ट में फंसाने की दी थी धमकी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शिप्रापथ थाने में तैनात महिला सब इंस्पेक्टर बबीता और उसके वकील पति अमरदीप को मंगलवार को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया था। उनपर शिप्रापथ इलाके में ऑनलाइन विज्ञापन का काम करने वाले एक फर्म संचालक को बिटकॉइन व आईटी एक्ट में फंसाने की धमकी देकर 5 लाख रु. की रिश्वत लेने का आरोप है।
45 लाख रुपए में हुआ था सौदा तय
एसआई फर्म संचालक से 50 लाख रु. मांग रही थी लेकिन सौदा 45 लाख तय में हुआ। बबीता ने थाने के सामने स्थित एक रेस्टोरेंट में परिवादी से पहली किस्त के 5 लाख लिए और उसे ले जाने के लिए अपने पति अमरदीप को मौके पर बुलाया। जब अमरदीप वह राशि लेकर रेस्टोरेंट के बाहर निकला तो एसीबी ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली। अब एसीबी दोनों से पूछताछ कर रही है।
एसआई का पति 10 दिन पहले ही मिल लिया था फर्म संचालक से
एसीबी ने आरोपियों के घर पर भी सर्च किया। जहां पर करोड़ों रुपए के प्रोपर्टी के दस्तावेज व 5 लाख रुपए से ज्यादा की नकदी मिली। बबीता के पति अमरदीप ने शिप्रापथ पर ऑनलाइन मार्केटिंग व विज्ञापन डिजाइनिंग का काम करने वाली एक फर्म के बिटकॉइन के मार्फत लाखों रुपए के लेन-देन के सबूत जुटा रखे थे। कंपनी के लेन-देन के डाटा की रिकॉर्डिंग सब इंस्पेक्टर के पति अमरदीप के पास थी। अमरदीप अपनी पत्नी के मार्फत आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की धमकी दे रहा था। वह 10 दिन पहले फर्म संचालक से मिला भी था।
पहले भी हो चुकी है सस्पेंड
अमरदीप और बबीता ने फर्म संचालक को आईटी एक्ट के तहत मुकदमे से बचाने की एवज में 50 लाख रुपए की डिमांड की। दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं करने पर सस्पेंड भी हो चुकीं बबीता वर्ष 2010 बैच की महिला सब इंस्पेक्टर है। पांच माह पहले बबीता को जयपुर कमिश्नरेट पुलिस लाइन से शिप्रापथ थाने में लगाया गया था। वह लम्बे समय से पुलिस लाइन में ही थी। इससे पहले बबीता ईस्ट जिले के प्रतापनगर थाने में तैनात थी। तब उस पर दुष्कर्म का एक मुकदमा दर्ज नहीं करने और आरोपी का पक्ष लेने के आरोप लगे थे। तब उसे प्रारंभिक जांच के बाद सस्पेंड कर दिया गया था।