राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्री कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। कुलिश जी पत्रकारिता को सत्ता सुख पाने की मंजिल नहीं मानते थे।
Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्री कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। कुलिश जी पत्रकारिता को सत्ता सुख पाने की मंजिल नहीं मानते थे। यह अवसर एक कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार और विचारक के रूप में उन्हें याद करने के साथ भारतीय पत्रकारिता के उन मूल्य और आदर्शों को पुन स्मरण करने का भी है, जिन्हें उन्होंने अपने प्रयासों से प्रतिष्ठित किया।
कुलिश जी एक चिंतक साहित्यकार और भारतीय ज्ञान परम्परा के योद्धा थे। उनके लेखन और विचारों में समाज, संस्कृति, मानवीय मूल्य संवेदनशीलता एवं धर्मनिरपेक्षता दिखाई देती थी, उनकी व्यापक दृष्टि आज भी पत्रिका के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान के सभी सदस्य कुलिश जी को नमन करते हुए उनके जीवन के आदर्शों को मानव जाति के लिए महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत मानते है। एक बार पुन कुलिश जी को नमन।
हुसैन खान, अध्यक्ष रणविजय सिंह राठौड़, सचिव
पत्रकारिता के पुरोधा कर्पूर चन्द्र कुलिश के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सीकर के विधायक राजेंद्र पारीक के पौत्र, कक्षा 6 के छात्र शिवादित्य पारीक ने एक स्कैच बनाया है। शिवादित्य ने यह स्कैच पत्रिका में प्रकाशित एक फोटो को आधार बनाकर तैयार किया। कम उम्र में उनकी यह कलात्मक प्रस्तुति न केवल उनकी प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि कुलिश जी के विचारों और व्यक्तित्व के प्रति नई पीढ़ी के जुड़ाव को भी उजागर करती है। कुलिश जी की विरासत आज भी युवाओं को प्रेरित कर रही है।
मरुधरा की रेत से उठकर एक दीप जलाया था।
सत्य की राह दिखाने को जीवन पथ बनाया था।
झुके नहीं सत्ता के आगे, झूठ से जिन्होंने युद्ध किया,
अन्यायों के काले बादल पर सच का वज्र प्रहार किया।
छोटा सा सपना लेकर जिसने एक इतिहास रचा,
जन-जन की आवाज बनकर हर दिल में विश्वास रचा।
कलम नहीं वह शक्ति थी जो अंधेरों से टकराती थी
सत्ता के सिंहासन तक सच की गूंज पहुंचाती थी।
जिस बीज को मेहनत से सींचा, वो वटवृक्ष बन जाता है,
आज वही बीज बढ़कर राजस्थान पत्रिका कहलाता है।
वेदों की वाणी, सत्य का पथ-जिनका जीवन मंत्र रहा,
निडर लेखनी से जिन्होंने हर अन्याय पर प्रहार किया।
जन्मशती के पावन अवसर पर हम सब शीश झुकाते हैं,
कुलिशजी के आदर्शों से सत्य का दीप जलाते हैं।
गौरव मेहरा, फुलेरा, जयपुर
हे यज्ञ पुरुष से ऐ काल पुरुष !
आपने सदियों का आह्वान किया,
आपने ही वेद विधाता बनकर ज्ञान कर्म में श्रेष्ठ दिया।
आपकी ऋषियों जैसी वाणी,
कण-कण में सुनाई देती है,
आपकी आहठ से ही यादें अंगड़ाईयां लेती है।
आज आपको याद किया कर्म बताती शक्ति में,
स्वार्थ भावना दूर की आपने देश प्रति भक्ति में।
श्रेष्ठ ज्ञान के दाता आपने हमको वेद दिया।
कर्पूर की भांति उज्ज्वल सा आपने हमको भेद दिया।
वेद ज्ञान को खोला आपने, अध्यात्म से जोड़ दिया,
वेद ज्ञान के राही आपने आज समझ को मोड़ दिया।
आपकी ज्ञान मीमांसों से विधि की वाणी डोल गई,
आपकी वैदिक अभिलाषा से गगने की शक्ति बोल गई।
जब भी कलम चली आपकी, आपने अनिसा ज्ञान दिया,
वेद को आस्था और भी है हम सब ने कुलिशजी जान लिया।
देवेंद्र कुमार, विजयनगर