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स्मृति में…राजस्थान की धड़कनों में कुलिशजी

काव्यांजलि

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Rajasthan Patrika

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

पोथी बांचै सब कोई, सांच न बांचे कोय।
कुलिश बांच्यो सांच ने, अमर नाम जग होय ।।

धोरा री धरती रो ओ, एक अणमोल रतन कर्पूर।
कुलिश नाम रो दीप जल्यो, मिट्यो घणो अंधियारो।।
कर्पूर बोली रो मारवाड़ी, बातां में धार।
अन्याय सूं कदे ई, नीं मानी कुलिश हार।।

राजस्थान पत्रिका री नींव धरी, सांच रो लेर साथ।
मरुधर रो गौरव बढ्‌यो, जद कलम लीनी हाथ।।
कबीर री वाणी जियां, 'पोलमपोल' रो सार।
कुलिश थारी याद में, झुकै प्रीत सु राजस्थान।।
चेत सवेरे उठ कर देख्या, मरुधर रो इक भान।
कुलिश नाम री जोत जगी जद, जाग्यो राजस्थान ।।

ना कोई राजा, ना कोई पासा, हाथ में बस एक कलम।
जळती धूप में छांव बण्या ओ, मेटण ने जग रा भरम।।
कबीर री वाणी बरती जियां, 'पोलमपोल' री बात।
ऊंच-नीच ने फाड़ फेंक दी, कलम दिखाई जात।।

सौ सालां री रीत सुहाणी, जुग जुग थारो नाम।
राजस्थान री माटी थाने, करें कोटि-कोटि परणाम।।

खड़ोलिया देवानंद, सरदारशहर, चूरू

पत्रिका समाज को दे रही नई दिशा और संदेश।
शब्दों से साकार कर रही, जन मन का मौन उपदेश।।

सपनों का भारत देश बने जनता करे अब सहयोग।
सुन्दर भारत देश बनाएं, अपना भी दीजिए योग।।
विचार परंपरा बढ़ा रहे, कुलिशजी सदा भरपूर।
कीर्ति फैलाई जीवन में, बने वो आंखों का नूर ।।

सद् विचार का वाहक बनकर, बदलावों की कलम बने
मिलकर दिया सहयोग सबने जन चेतना माध्यम बने ।।
कहती राजस्थान पत्रिका, समझौते की जगह नहीं।
निष्पक्ष पत्रकारिता करे, इसीलिए सिरमोर रही।।

अनन्त विस्तार सबको दिखे समाचार में गहराई।
ये मुद्दो की बातें कहती, आवाज कभी न दबाई।।
जग में इसने साख बनाई, चेतना के द्वार खोले।
पर्यावरण बचाने इसने, सच वचन हर बार बोले ।।

मंगल कुमार जैन, उदयपुर