जयपुर

जयपुर SMS अस्पताल में 6 साल से बंद नशा मुक्ति वार्ड, रोज 180 मरीज परेशान; इलाज के लिए 4 किमी दूर जाने की मजबूरी

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में छह साल बाद भी नशा मुक्ति वार्ड दोबारा शुरू नहीं हो सका है। रोजाना 150 से 180 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन भर्ती की जरूरत होने पर उन्हें चार किलोमीटर दूर मनोचिकित्सालय जाना पड़ता है।
2 min read
• •
Oct 21, 2026
SMS Hospital Jaipur
फाइल फोटो

जयपुर. एसएमएस अस्पताल में नशा मुक्ति के मरीजों की कहानी सुन लीजिए… उन्हें डॉक्टर देखेंगे, सलाह देंगे, भर्ती की जरूरत भी बताएंगे, लेकिन बेड नहीं मिलेगा। उसके लिए मरीज को शहर के दूसरे कोने तक जाना होगा। एसएमएस अस्पताल के बांगड़ परिसर में पहले 20 बेड का नशा मुक्ति वार्ड संचालित होता था। सितंबर 2020 में कोरोना काल के दौरान इसे अस्थायी तौर पर मनोचिकित्सालय शिफ्ट किया गया था, जो छह साल बाद भी वापस नहीं लौट सका। रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों में कई ऐसे होते हैं जिन्हें तत्काल भती होना चाहिए, लेकिन सिस्टम उन्हें उपचार से ज्यादा 'यात्रा' का अनुभव दे रहा है। इलाज कम, चक्कर ज्यादा… यही हकीकत बन गई है। भर्ती होने के लिए उन्हें चार किलोमीटर दूर सेठी कॉलोनी स्थित मनोचिकित्सालय जाना पड़ रहा है। अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड नहीं होने से गंभीर मरीजों के इलाज में परेशानी हो रही है। कई मरीज मनोचिकित्सालय में भर्ती होने से भी हिचकते हैं, जिससे उनका उपचार प्रभावित होने की आशंका रहती है।

रोजाना 180 मरीज तक

वर्तमान में धनवंतरि ब्लॉक स्थित नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी में रोजाना 150 से 180 मरीज आते हैं। इनमें से 5 से 8 मरीजों को तत्काल भर्ती करने की जरूरत पड़ती है, लेकिन अस्पताल में भर्ती की सुविधा नहीं है।

दूसरी बीमारियों के इलाज में भी परेशानी

डॉक्टरों के अनुसार, नशे की लत से ग्रस्त मरीजों में लिवर, किडनी, हार्ट और पेट संबंधी बीमारियां भी होती हैं। एसएमएस में भर्ती रहने पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और मेडिसिन विभागों की मदद तुरंत मिल सकती है। यहां सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआइ और जरूरत पड़ने पर आइसीयु की सुविधा भी उपलब्ध है।

दिवाली के बाद सुधार की आस

एसएमएस में नशा मुक्ति वार्ड दोबारा शुरू करने के प्रयास अब तक सिरे नहीं चढ़े हैं। अस्पताल प्रशासन जगह की कमी को इसकी वजह बताता रहा है। दिवाली तक कार्डियक टावर में आइपीडी शुरू होने के बाद बांगड़ परिसर में वार्ड खाली होने की संभावना है। ऐसे में वहां नशा मुक्ति वार्ड दोबारा शुरू किया जा सकता है।

अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड की जरूरत है। जगह की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। जल्द ही इसके लिए जगह तलाशकर वार्ड शुरू करेंगे।
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

Updated on:
21 Oct 2026 10:21 am
Published on:
21 Oct 2026 10:21 am