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राजस्थान में कम बारिश से पेयजल में 30 प्रतिशत तक कमी के आसार, सरकार तैयार करा रही जिलेवार कंटेजेंसी प्लान

Rajasthan Water Crisis: कम बारिश के चलते राजस्थान में आगामी महीनों में मौजूदा जलस्रोतों से पेयजल की उपलब्धता 30 प्रतिशत तक घटने की आशंका को देखते हुए सरकार ने संकट से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
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Rajasthan Contingency Plan

पेयजल संकट से निपटने की तैयारी। फोटो: एआई

Rajasthan Contingency Plan: जयपुर। कम बारिश के चलते राजस्थान में आगामी महीनों में मौजूदा जलस्रोतों से पेयजल की उपलब्धता 30 प्रतिशत तक घटने की आशंका को देखते हुए सरकार ने संकट से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। जलदाय विभाग जिलेवार कंटिजेंसी प्लान तैयार कर रहा है। आपातकालीन व्यवस्थाओं के लिए जिला कलक्टरों को अक्टूबर से दिसम्बर तक हर जिले में 75 लाख रुपए तक के पेयजल कार्यों के प्रस्ताव मंजूर कराने के अधिकार दिए गए हैं।

कंटिजेंसी प्लान में पेयजल स्रोतों की मौजूदा स्थिति, भू-जल की उपलब्धता, ट्यूबवेल और खुले कुओं की स्थिति तथा वैकल्पिक जलस्रोतों की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा, जहां गर्मियों में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका अधिक है। ऐसे क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल खुदवाने, खराब पंप-मोटर बदलने, पाइपलाइन की मरम्मत और अन्य जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में पीएचईडी के समन्वय से टैंकरों या अन्य माध्यमों से पानी पहुंचाने के प्रस्ताव भी तैयार किए जा सकेंगे।

कोटा सहित कुछ क्षेत्रों में स्थिति ठीक

कोटा, झालावाड़, डीग, बांसवाड़ा सहित कुछ क्षेत्रों में फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत ठीक बताई जा रही है। सिंचाई के लिए पानी के आवंटन या नहरों के संचालन की नई व्यवस्था की भी प्लानिंग की जा रही है।

जिलों में बारिश की स्थिति

-14 जिलों में कम वर्षा
-12 जिलों में औसत से कम वर्षा
-15 जिलों में सामान्य बारिश

75 लाख रुपए तक के आपातकालीन कार्य

जिला कलक्टर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कार्यों के प्रस्ताव संबंधित अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को भेज सकेंगे। इन कार्यों की स्वीकृति आइएफएमएस 3.0 मॉड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन जारी होगी। खराब पंप-मोटर बदलने, अचानक सूखने या खराब होने वाले ट्यूबवेल के विकल्प के रूप में जलस्रोत विकसित करने, पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत जैसे छोटे लेकिन जरूरी कामों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।

इनका कहना है

सभी जिलों से जलस्रोतों की स्थिति की रिपोर्ट लेकर कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नए ट्यूबवेल, पंप-मोटर बदलने और पाइपलाइन मरम्मत जैसे कार्य चिह्नित किए जाएंगे।
-देवराज सोलंकी, मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग