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National Household Travel Survey: आधुनिक दौर में गांव-ढाणियों तक सड़क और परिवहन के साधनों की बहुतायात के बावजूद देश के कई राज्यों में अधिकतर विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों तक सफर पैदल ही तय कर रहे हैं। राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (एनएचटीएस) की रिपोर्ट के अनुसार देश में 6 से 29 आयु वर्ग के 37 फीसदी विद्यार्थी घर से शिक्षण संस्थानों तक पैदल आ-जा रहे हैं। 6 से 14 आयु वर्ग में तो ये आंकड़ा 47.3 प्रतिशत है। यही नहीं घर से स्कूल पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को औसत समय भी 31 मिनट तक लग रहा है। राजस्थान में यह आंकड़ा 24 मिनट का है।
रिपोर्ट के अनुसार, छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों में 47.3 प्रतिशत पैदल स्कूल आते-जाते हैं। इस आयु वर्ग में 28.4 प्रतिशत विद्यार्थी बस और 11.9 प्रतिशत साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। 7.7 प्रतिशत ऑटो रिक्शा और 5.1 प्रतिशत दोपहिया वाहनों से सफर करते हैं। कार से जाने वाले विद्यार्थियों की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत है।
15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में तस्वीर कुछ अलग है। इस वर्ग के 31 प्रतिशत विद्यार्थी बस, 22.2 प्रतिशत पैदल और 21.4 प्रतिशत साइकिल से संस्थान पहुंचते हैं। वहीं, 14.6 प्रतिशत ऑटो रिक्शा और 9 प्रतिशत दोपहिया वाहनों का उपयोग करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में लगने वाला समय राज्यों के हिसाब से अलग-अलग है। हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में औसतन 31 मिनट लगते हैं, जो देश में सबसे अधिक है। वहीं, लक्षद्वीप में यह समय सबसे कम, केवल 12 मिनट है। राजस्थान में विद्यार्थियों को घर से स्कूल या कॉलेज पहुंचने में औसतन 24 मिनट लगते हैं। केरल और तमिलनाडु में यह अवधि 27-27 मिनट है, जबकि आंध्र प्रदेश में विद्यार्थियों को औसतन 26 मिनट लगते हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच भी पहुंचने के समय में अंतर देखने को मिलता है। देशभर में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में औसतन 23 मिनट लगते हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह समय 22 मिनट है। इस तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों का औसत यात्रा समय शहरी क्षेत्रों की तुलना में एक मिनट अधिक है।
Published on:
21 Oct 2026 03:00 am
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