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आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख और वैश्विक साझेदारी की कसौटी, एस. जयशंकर के संदेश के मायने

मुंबई में एस. जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा का अधिकार रखता है और सहयोगी देशों से भी जीरो टॉलरेंस की उम्मीद करता है। उन्होंने 26/11 स्मारक पर मार्को रुबियो के श्रद्धांजलि देने की सराहना की।
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भारत

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Anurag Animesh

•

Oct 20, 2026

S Jaishankar statement

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिले एस. जयशंकर, कई मुद्दों पर चर्चा(फोटो-IANS)

S Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह अपने सहयोगी देशों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की उम्मीद करता है। उन्होंने मुंबई के ताज होटल स्थित 26/11 आतंकी हमले के स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सराहना की।

मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'फ्रीडम 250' समारोह में जयशंकर ने यह बात कही। कार्यक्रम में रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की व्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में भारत-अमेरिका के बीच सहयोग को और मजबूत करना जरूरी है।

26/11 स्मारक पर रुबियो के श्रद्धांजलि देने की सराहना

जयशंकर ने कहा कि मुंबई और पूरा भारत ताज होटल के 26/11 स्मारक पर रुबियो के श्रद्धांजलि देने के कदम की सराहना करता है। उन्होंने आतंकवादी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का भी स्वागत किया।विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार को लेकर स्पष्ट है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत के साझेदार देश भी आतंकवाद के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरतेंगे।

बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-अमेरिका सहयोग अहम

जयशंकर ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया की व्यवस्था बदल रही है और देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसले ले रहे हैं। ऐसे समय में भारत और अमेरिका के बीच साझा हितों को बढ़ाना दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम है। उन्होंने व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्रों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों का जिक्र किया। जयशंकर के मुताबिक, नियमित बातचीत और साझा हितों की पहचान से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने को भी दोनों देशों का साझा हित बताया।

रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में बढ़ा सहयोग

विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी ने भारत के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा और तकनीक के विकास में योगदान दिया है। वहीं, भारतीय प्रतिभा और कौशल ने अमेरिका के तकनीकी क्षेत्र को आकार देने में भूमिका निभाई है। जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दोनों देशों के संबंधों का दायरा बढ़ा है। उन्होंने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहल का उदाहरण देते हुए ऊर्जा, रक्षा और नागरिक विमानन के क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया।

भारत-अमेरिका रिश्तों में मुंबई की खास भूमिका

जयशंकर ने मुंबई को भारत की वित्तीय राजधानी बताते हुए कहा कि यह शहर कारोबार, फिल्म, शिक्षा, शोध, तकनीक, संस्कृति और मीडिया का भी प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि मुंबई लंबे समय से भारत और अमेरिका के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।