
भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो। (फोटो- IANS)
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस वक्त भारत दौरे पर हैं। आज भारत पहुंचते ही उन्होंने युद्ध के बीच यूक्रेन को अमेरिकी मिसाइल देने में देरी को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
बता दें कि कुछ ही दिनों पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच डीजल समझौता हुआ था। इस डील के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की लगातार अमेरिका पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने यह तक कह दिया है कि पुतिन के दबाव में अमेरिका अब यूक्रेन की मदद नहीं करना चाहता, यही वजह है कि मिसाइल देने में देरी कर रहा है।
अमेरिका और यूक्रेन के बीच हथियारों की सप्लाई को लेकर बढ़ते तनाव के बीच मार्को रुबियो ने सफाई दी है कि यूक्रेन के लिए खरीदे गए कुछ मिसाइल इंटरसेप्टर अब तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन इसके पीछे कोई राजनीतिक वजह नहीं है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका की ओर से यूक्रेन को नुकसान पहुंचाने या जानबूझकर हथियार रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
मार्को रुबियो ने कहा कि यूक्रेन को नुकसान पहुंचाने के इरादे से कोई राजनीतिक फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका जानबूझकर यूक्रेन को जरूरी हथियारों से वंचित नहीं कर रहा है।
उन्होंने खुलकर कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने राजनीतिक कारणों से यूक्रेन की मदद रोकने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यूक्रेन के लिए खरीदे गए मिसाइल इंटरसेप्टर की डिलीवरी में देरी क्यों हुई और ये हथियार कब तक पहुंच सकते हैं।
बता दें कि मिसाइल इंटरसेप्टर किसी दुश्मन की ओर से दागी गई मिसाइल को हवा में ही रोकने या नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। रूस के लगातार मिसाइल हमलों के बीच यूक्रेन के लिए इनकी अहमियत काफी ज्यादा है।
रुबियो ने बताया कि मंगलवार को उनकी यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान कई अहम सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की गई।
जेलेंस्की ने भी बातचीत की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर, रूस के हमलों की पहले से चेतावनी देने की व्यवस्था और स्टारलिंक व स्टारशील्ड सैटेलाइट सेवाओं पर चर्चा हुई।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इन सैटेलाइट सेवाओं को फिर से बहाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। युद्ध के दौरान यूक्रेन की सेना के लिए संचार और सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना बेहद जरूरी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो देशों की ओर से यूक्रेन के लिए खरीदे गए अमेरिकी हथियारों की नई खेप की डिलीवरी को लेकर भी सवाल उठे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कथित तौर पर अभी तक इस खेप की डिलीवरी को मंजूरी नहीं दी थी।
यूक्रेन पहले ही आरोप लगा चुका है कि पेंटागन ने कार्यक्रम के तहत मिसाइलों की आपूर्ति में देरी की है। हालांकि, रुबियो के बयान से यह साफ नहीं हुआ कि संबंधित हथियारों की डिलीवरी कब शुरू होगी।
Updated on:
20 Oct 2026 06:01 pm
Published on:
20 Oct 2026 06:01 pm
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