डाक विभाग : बिजली बिल बचाने के लिए जयपुर. राजधानी समेत राज्यभर में डाकघरों को ताले लगाने के तूल पकड़ते मामले के बीच मुफ्त बिजली का मामला गरमा गया है। विभाग के अफसरों को अपने घर के बिजली का बिल खुद को चुकाना होता है, लेकिन विभाग के उच्चाधिकारियों के घर सरकारी खर्चे से न केवल सोलर पैनल लगा दिया गया, बल्कि सुरक्षा की आड़ में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
इसमें मुख्य पोस्टमास्टर जनरल को आवंटित घर शामिल है। मामला गरमाने के बाद निदेशक (डाक सेवाएं) के घर पर लगाने का काम रोक दिया गया है। सांसद रामचरण बोहरा तक ने इस मामले में केन्द्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की पुरजोर वकालत की है। भारतीय मजदूर संघ ने भी शिकायत की है। इसके बाद दिल्ली मुख्यालय तक हलचल मच गई और जांच शुरू की गई है। उधर, विभागीय उच्चाधिकारियों ने विभाग को आर्थिक नुकसान या गड़बड़ी से इनकार किया है।
यह होना था: विभाग के हर अधिकारी को अपने आवंटित घर के बिजली का बिल स्वयं चुकाना होता है। इसका न तो बिल भुगतान होता है और न ही पुनर्भुगतान।
हुआ यह: सी-स्कीम में आवंटित आवास की छत पर विभागीय खर्चे पर सोलर पैनल लगवाए गए। इस पर करीब 2.25 लाख रुपए खर्च हुए। संबंधित अधिकरियों ने भी आपत्ति नहीं की।
यह होना था: आवंटित घर फर्नीशिंग का काम विभागीय खर्चे पर कराया जा सकता है। फर्नीशिंग खर्चे में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया जा सकता है।
हुआ यह: इसकी जानकारी होने के बावजूद करीब 43 हजार रुपए का खर्चा किया गया।
डाकघर बंद, तूल पकड़ रहा मामला...
अभी तक 12 डाकघर बंद किए जा चुके हैं, इन्हें पास के दूसरे डाकघर में मर्ज किया गया। इसके अलावा अन्य डाकघरों की सूची भी तैयार है। ये सभी डाकघर निजी प्रॉपर्टी पर संचालित होते रहे, जिन्हें अब खाली किया गया है। मामला भी केन्द्रीय मंत्री तक पहुंच गया है। दिल्ली में मुख्यालय से हस्तक्षेप के लिया कहा गया है। यहां करीब 1.25 लाख खाताधारक हैं। सूत्रों के मुताबिक गुजरात में भी पहले ऐसा किया गया। सवाल इसीलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कई डाकघर में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही लगी रहती है, तो फिर बंद क्यों किए।
&घर से ऑफिस का काम करते हैं। एक तरह से सेमी ऑफिस कह सकते हैं। ऐसे में सरकारी आवंटित आवास में सोलर पैनल लगवाने में क्या गलत हो सकता है। बिजली का बिल कम चुकाना पड़ता है।
-दिनेश कुमार, निदेशक, डाक विभाग