जयपुर

महाप्रभु वल्लभाचार्य का प्राकट्य दिवस विशेष

वल्लभाचार्य : पुष्टिमार्ग के महान प्रवर्तक

3 min read
Apr 12, 2026

गोवर्द्धन दास बिन्नाणी- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिले में स्थित चम्पारण, जहां रायपुर से लगभग एक से डेढ़ घंटे में सड़क रास्ते से आसानी से पहुंचा जा सकता है। वैष्णव पीठ पूरे भारत और विदेशों में रहनेवाले वैष्णव भक्तों के लिए एक श्रद्धा का केंद्र है क्योंकि यहां वैष्णव सम्प्रदाय के प्रवर्तक महाप्रभु वल्लभाचार्यजी का जन्म हुआ था। हालांकि उनका पैतृक गांव आंध्र प्रदेश में स्थित था। उनके पिता लक्ष्मण भट्टजी व माता इल्लम्मागारूजी अपने पूर्वजों की तरह ही बहुत ही धार्मिक थे। उनके वंशजों ने 100 सोमयज्ञों का संकल्प जब लिया था उस समय मुरली मनोहर श्री कृष्ण पीताम्बर-पीली धोती पहने प्रकट हो बता दिया था कि जब आपके वंश में 100 सोमयज्ञ पूरे हो जाएंगे, तो मैं स्वयं धर्म की रक्षा के लिए आपके वंशज के रूप में जन्म लूंगा और 100 वां सोमयज्ञ लक्ष्मण भट्टजी के द्वारा पूर्ण करते ही इल्लम्मागारूजी गर्भवती हो गईं।

इसके बाद वे दोनों मुस्लिम आक्रमण के भय से काशी तीर्थ से अपने पैतृक राज्य लौट रहे थे, तभी मार्ग में पड़ने वाले चम्पारण में वैशाख कृष्ण वरुथिनी एकादशी को, उनकी माता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और महाप्रभुजी का प्राकट्य हुआ । वल्लभाचार्यजी जन्म के समय मृतवत थे। अतः उन्हें पत्तों में लपेट कर शमी वृक्ष के कोटर में रख श्रीलक्ष्मणभट्टजी अपनी पत्नी के साथ आगे चौडा गांव पहुँच रात्रि विश्राम कर रहे थे। वहां उन दोनो को स्वप्न से ज्ञात हुआ कि जिस नवजात शिशु को वे मृत जानकर छोड़ आए थे वह तो सौ सोमयज्ञों के बाद होने वाले भगवान् के प्राकट्य हैं। अतः वे वापस तीसरे दिन चम्पारण उस जगह लौटे और पाया कि वे जीवित ही नहीं हैं, बल्कि उनके चारों तरफ अग्नि का घेरा उनकी रक्षा कर रहा था। इसी कारण से महाप्रभुजी को अग्नि स्वरूप भी माना गया है।

बीसवीं सदी में उनके अनुयायियों ने उनका एक प्रसिद्ध मन्दिर स्थापित किया, जहां प्रत्येक वर्ष वैशाख कृष्ण वरुथिनी एकादशी को उनका जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। महाप्रभुजी ने लगभग उन्नीस वर्षो में सम्पूर्ण भारत का तीन बार पैदल देशाटन किया और हर बार प्रवास के समय उन्होनें हमेशा अपना पड़ाव किसी जलाशय के किनारे एकान्त अर्थात भीड़-भाड़ से दूर रुककर भागवत सप्ताह का पारायण किया। जिन-जिन स्थलों पर उन्होने भागवत पारायण किया वे सारी जगहें हिफाजत से संरक्षित की गईं और वे सभी स्थल बैठक कहलाईं। पूरे भारत मे इस तरह 84 बैठकें हैं। इन 84 बैठकों में से दो बैठकें तो चम्पारण में ही हैं।

दूसरी बार देशाटन के समय पंढरपुर प्रवास के दौरान आपको स्वयं प्रभु विट्ठलनाथजी ने गृहस्थाश्रम स्वीकार करने की आज्ञा दी साथ में यह भी बता दिया कि मैं स्वयं तुम्हारे यहाँ जन्म लूंगा। इस भगवद् आज्ञा को शिरोधार्य कर वल्लभाचार्यजी ने काशी जाकर श्रीदेवन भट्ट की सुपुत्री महालक्ष्मीजी से विवाह करने के पश्चातआप तीसरी बार पुनः पृथ्वी परिक्रमा के प्रवास पर पधारे। जब गोकुल प्रवास के समय वे जीव को पूर्ण निर्दोष कैसे बनाएं,समस्या पर चिन्तन कर रहे थे तभी श्रावण शुक्ला एकादशी की मध्यरात्रि में प्रभु श्री गोवर्धनधरण का आदेश हुआ कि ब्रह्म सम्बन्ध से जीवों के सभी प्रकार के दोषों की निवृति हो जाएगी। आपने उस आज्ञा को शिरोधार्य कर प्रभु को पवित्रा धराकर मिश्री भोग धराया। प्रातः उन्होंने प्रिय शिष्य

दामोदरदास हरसानी को ब्रह्म सम्बन्ध की दीक्षा दी। इस तरह उस दिन से पुष्टि सम्प्रदाय में दीक्षा का शुभारम्भ हुआ।
कालान्तर में अर्धांगिनी से अग्नि प्रकोप द्वारा आज्ञा प्राप्त कर मानस सन्यास, दण्डधारण कर लिया। वल्लभाचार्य जी के दो पुत्र हुए। बड़े पुत्र का नाम गोपीनाथजी व छोटे वाले का विट्ठलनाथजी जिन्हें गोसाईंजी या गुसाईंजी या गोस्वामीजी के रूप में भी जाना जाता है। सन्यास उपरान्त आप काशी में हनुमानघाट पर रहने लगे साथ ही वहां भी कुछ समय पश्चात उन्होंने मौन धारण कर लिया, जिसके चलते जब दोनों पुत्र उनके दर्शनों के लिए आए तब आप बातचीत न कर गंगाजी की रेत पर साढे़ तीन श्लोक द्वारा शिक्षा दे दी। ये श्लोक शिक्षा श्लोकों के नाम से पुष्टि सम्प्रदाय में विख्यात है।

कुछ समय बाद पुनः भगवद आज्ञा हुई तब आप गोवर्द्धन धरण श्रीनाथजी के दर्शन कर सजल नेत्रों से आचार्य श्री वि. स. 1587 आषाढ शुक्ला 2 के उपरान्त तृतीया के मध्याह्न के समय स्वयं पुण्य प्रवाहिनी भगवती गंगाजी के निर्मल जल में समाधि के लिए पधारे। देखते-देखते उनका श्री विग्रह दृष्टि से ओझल हो गया और दृष्टिगोचर हुवा केवल एक प्रकाशपुंज और वह भी आंखों के सामने अन्तरिक्ष में विलीन हो गया। पुष्टिमार्ग के महाप्रभु के स्वधाम प्रस्थान को आसुर व्यामोह लीला कहा जाता है।

Updated on:
12 Apr 2026 04:54 pm
Published on:
12 Apr 2026 04:53 pm
Also Read
View All