12 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Politics : ‘जिन्हें ABCD नहीं मालूम, वो कर रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस’, रिफायनरी मुद्दे पर ‘भड़के’ अशोक गहलोत, वसुंधरा को लेकर कही ये बड़ी बात

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट में हो रही देरी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा नेताओं की बयानबाजी पर कहा कि जिन्हें रिफाइनरी की 'ABCD' नहीं पता वे भाषण दे रहे हैं, जबकि असली जवाबदेही वसुंधरा राजे की है।

3 min read
Google source verification
Ashok Gehlot and Vasundhara Raje - File PIC

Ashok Gehlot and Vasundhara Raje - File PIC

राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना 'बाड़मेर रिफाइनरी' एक बार फिर सियासत के केंद्र में है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा सरकार की नीतियों और देरी पर जमकर प्रहार किया। गहलोत ने प्रोजेक्ट की लागत में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए सवाल किया कि आखिर इस 'सेटबैक' का असली जिम्मेदार कौन है?

'37 हजार करोड़ से 80 हजार करोड़ का सफर'

गहलोत ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली के समय हुआ था, उसे भाजपा ने राजनीतिक द्वेष के चलते वर्षों तक लटकाए रखा। "कहां 37 हजार करोड़ की योजना थी और आज यह 80 हजार करोड़ के पार पहुंच गई है। यह 43 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार राजस्थान की जनता की जेब पर है। 2014 से 2018 तक इस काम को बंद क्यों रखा गया? अब 2024 का वादा करके इसे 2026 तक खींच लिया गया है।"

'जिन्हें ABCD नहीं पता, वे कर रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस'

भाजपा के वर्तमान नेतृत्व और प्रवक्ताओं पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जैसे जटिल विषयों पर वे लोग बयान दे रहे हैं जिन्हें इस तकनीक की बुनियादी समझ ABCD भी नहीं है।

उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का नाम लेते हुए कहा, "अगर रिफाइनरी पर डिबेट करनी है तो वसुंधरा जी को सामने लाएं। उन्हें पता था कि हमने क्या एग्रीमेंट किया और उन्होंने क्या गलतियां कीं। आज के दौर में सिर्फ वसुंधरा राजे ही रिफाइनरी पर बोलने का अधिकार रखती हैं, बाकी नेता तो सिर्फ रटे-रटाए भाषण ठोंक रहे हैं।"

मदन राठौड़ को सलाह, 'पहले स्टडी करें, फिर अटैक करें'

गहलोत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें अपने प्रवक्ताओं का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। गहलोत ने चुनौती देते हुए कहा, "राठौड़ साहब, पहले पूरी रिसर्च और स्टडी करवाएं कि हमारी सरकार की क्या कमी थी, फिर जमकर बोलें। हम भी जमकर जवाब देंगे। बिना जानकारी के रोजमर्रा के बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ता।"

'बाहरी लोग उठा ले जाएंगे फायदा'

अशोक गहलोत ने भविष्य की चुनौतियों पर जोर देते हुए कहा कि रिफाइनरी का असली फायदा केवल टैक्स और रेवेन्यू नहीं है, बल्कि 'एंसीलरी यूनिट्स' (सहायक उद्योग) हैं। उन्होंने चिंता जताई कि रीको (RIICO) क्षेत्र में जो प्लॉट काटे जा रहे हैं, उनमें राजस्थान के स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यहां 100-150 तरह के प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योग लग सकते हैं। यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो बड़ौदा और गुजरात के अनुभवी उद्योगपति यहां कब्जा कर लेंगे और राजस्थान के युवाओं को केवल मजदूरी मिलेगी, उद्यमिता नहीं।

भागीदारी का विवाद: क्यों ली 26% हिस्सेदारी?

रिफाइनरी में राज्य सरकार की 26% भागीदारी पर सफाई देते हुए गहलोत ने कहा कि वसुंधरा सरकार के समय इसे 'घाटे का सौदा' बताकर मिसगाइड किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भागीदारी लेना हमारी मजबूरी थी क्योंकि HPCL जैसी कंपनियां बिना स्टेट पार्टनरशिप के आगे नहीं आ रही थीं। उन्होंने भाजपा नेताओं को याद दिलाया कि यह 'देश की सबसे आधुनिक और हाई-टेक्नोलॉजी रिफाइनरी' है, जिसे राजनीति की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।