
रायचूर. श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ रायचूर के तत्वावधान में आयोजित वर्षावास महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। समणी डॉ. सुयशनिधि एवं समणी सुयोगनिधि आदि ठाणा-2 के पावन सान्निध्य में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मश्रवण, तप एवं आराधना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए समणी डॉ. सुयशनिधि ने "धर्म उत्कृष्ट मंगल है" विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में मंगल की कामना करता है, लेकिन वास्तविक मंगल धन, वैभव, पद या भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि धर्ममय जीवन से प्राप्त होता है। उन्होंने भगवान महावीर के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा, संयम और तप ही उत्कृष्ट धर्म हैं तथा जो व्यक्ति इन सिद्धांतों को जीवन में अपनाता है, उसके प्रति देवता भी श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि विचारों, वाणी और आचरण की पवित्रता का नाम है। जब मनुष्य क्षमा, संयम, अहिंसा और तप को अपने जीवन का आधार बनाता है, तब उसका अंत:करण निर्मल होता है और आत्मा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्ममय जीवन अपनाकर अपने जीवन को सार्थक और मंगलमय बनाने का आह्वान किया। Bआराधना तपB
वर्षावास के दौरान चार उपवास, तेला (तीन उपवास), बेला (दो उपवास), उपवास, एकासन और बिआसन सहित अनेक तपस्याएं बड़ी संख्या में चल रही हैं। प्रवचन के बाद श्रद्धालुओं से तीन प्रश्न पूछकर जिनवाणी के प्रति उनकी समझ और अध्ययन को प्रोत्साहित किया गया।कार्यक्रम के संचालक पवन नाहर ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर 2.30 से 3.30 बजे तक ज्ञानवृद्धि के लिए आगमोक्त बोलों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही शनिवार से प्रारंभ होने वाली सोलह सती आराधना तप में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेने की इच्छा व्यक्त की है।